कान की व्यथा – व्यंग

मनोरंजन/डेस्क मैं हूँ कान… हम दो हैं… जुड़वां भाई… लेकिन हमारी किस्मत ही ऐसी है कि आज तक हमने अपने दूसरे भाई को देखा तक नहीं… पता नहीं कौन से श्राप के कारण हमें विपरित दिशा में चिपका कर भेजा गया है… दुख सिर्फ इतना ही नहीं है… हमें जिम्मेदारी सिर्फ सुनने की मिली है … Read more

भोले-भाले / अशोक चक्रधर

व्यंग 1. जिज्ञासा एका एक मंत्री जी कोई बात सोचकर मुस्कुराए,कुछ नए से भाव उनके चेहरे पर आए। उन्होंने अपने पी.ए. से पूछा— क्यों भई,ये डैमोक्रैसी क्या होती है?पी.ए. कुछ झिझका सकुचाया, शर्माया। -बोलो, बोलो डैमोक्रैसी क्या होती है?-सर, जहां जनता के लिए जनता के द्वारा जनता की ऐसी-तैसी होती है, वहीं डैमोक्रैसी होती है। … Read more

बजी चुनावी डुग डुगी (व्यंग्य)

डॉ सजल प्रसाद लो भइया ! ई कोरोना काल में ही बज गई है चुनावी डुगडुगी .. असेम्बली इलेक्शन की … अउर काहे की बजेगी डुगडुगी ! लग गए हैं सब पार्टी के आलाकमान फेंटा बाँध के ..कोरोना अपनी जगह अउर इलेक्शन अपनी जगह ! गाँव में सियासत की अच्छी समझ रखने वाले पचहत्तर वर्षीय … Read more