चुनिंदा शायरी

जो महसूस करते हैं वो बयाँ कर देते हैं,हमसे लफ़्ज़ों की दग़ाबाज़ी नहींं होती। आहिस्ता आहिस्ताआहिस्ता आहिस्ता बढ़ रहीं हैंचेहरे की लकीरें….!!शायद नादानी औरतजुर्बे मेंबंटवारा हो रहा है….!! दुरियां जब बढ़ी तो,गलतफैमियां भी बढ़ गई।फिर उसने वो भी सुना,जो मैने कहा ही नहीं। कुछ इस तरह से हमारीबातें अब कम हो गयीकैसे हो? से शुरू … Read more

शायरी :शानदार शायरी ,चुनिंदा शायरी पढ़े …….

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए – बशीर बद्र ——————————————— और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा -फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ ———————— रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ आ फिर … Read more

शायरी : सुनो ❤️साहिबा

सुनो ❤️साहिबा उठा लो दुपट्टे को ज़मीन से कहीं दाग़ न लग जाए पर्दे में रखा करो चेहरे❤️ कोअपनेजग में कही आग?न लग जाये…गर्ग जी ————————————————- बोल उठे लफ्ज किताबो से…..बोल उठे लफ्ज किताबो सेतुमसे मिलना तो है मुश्किलफिर क्यों प्यार झलकता है आंखों सेतुमसे मिलना तो है मुश्किल फिर क्यो प्यार झलकता है आखो … Read more

मैं अश्कों में बहतें तराने लिखूंगी -निधि चौधरी

मैं अश्कों में बहतें तराने लिखूंगी,बुरे दौर के कुछ फ़साने लिखूंगी। कि दुनिया हमारी है जालिम बहुत ही,वो मासूम दिखते सयाने लिखूंगी। सदाकत, रफ़ाक़त, मुहब्बत हमारी,ये सारे कुचलते ज़माने लिखूंगी। सिकंदर हज़ारों ज़माने में लेकिन,मैं हारे हुए दास्ताने लिखूंगी। इबादत है बिकती हां भक्ति भी बिकती,मैं सच बोलते वो मय’खाने लिखूंगी। ज़मीं से उठा के … Read more

संवेदनहीनता

निधि चौधरी “”””””””’””””””””””नूर लिखूं, बेनूर लिखूं,जीस्त नशे में चूर लिखूं।नाते जल गए अग्नि कुंड में,किसका यह कुसूर लिखूं।बिच्छू पाले डंक सम्हाले,कैसे उनको मस्तूर लिखूं।ज़र्रे ज़र्रे दर्द ही पाया हमने,क्या दर्द को अपने तूर लिखूं।कलयुग का यह रूप भयावह,कलयुग के कैसे दस्तूर लिखूं।

परवीन शाकिर की तीन बेहतरीन रचनाएं

(१) उलझन रात भी तन्हाई की पहली दहलीज़ पे हैऔर मेरी जानिब अपने हाथ बढ़ाती हैसोच रही हूंउनको थामूंज़ीना-ज़ीना सन्नाटों के तहख़ानों में उतरूंया अपने कमरे में ठहरूंचांद मेरी खिड़की पर दस्तक देता है (२)बारिश बारिश में क्या तन्हा भीगना लड़की!उसे बुला जिसकी चाहत मेंतेरा तन-मन भीगा हैप्यार की बारिश से बढ़कर क्या बारिश होगी!और … Read more

पिंजरे में मुनिया – अकबर इलाहाबादी

मुंशी कि क्लर्क या ज़मींदार लाज़िम है कलेक्टरी का दीदार  हंगामा ये वोट का फ़क़त है मतलूब हरेक से दस्तख़त है हर सिम्त मची हुई है हलचलहर दर पे शोर है कि चल-चल टमटम हों कि गाड़ियां कि मोटरजिस पर देको, लदे हैं वोटर शाही वो है या पयंबरी हैआखिर क्या शै ये मेंबरी है … Read more

शायरी

सफ़र ए इश्क़ हो या मयख़ाने का दवाखाना,  दोनों का असर एक है बस होश को गंवाना।….. ——————– मुझे तोहफ़े में अपनो का वक्त पसंद है…लेकिन आजकल इतने मंहगे तोहफ़े देता कौन है… —————— दिल की चोटों ने कभी चैन से रहने न दिया जब चली सर्द हवा मैं ने तुझे याद किया ——————- फ़िक्र तो तेरी … Read more

शायरी !

साथ ना रहने से रिश्ते टूटा नहीं करते ,वक़्त की धुंध से लम्हे टूटा नहीं करते ,लोग कहते हैं कि मेरा सपना टूट गया,टूटी नींद है , सपने टूटा नहीं करते । एक ही चेहरे की अहमियत…हर एक नजर में अलग सी क्यूँ है,उसी चेहरे पर कोई खफा,तो कोई फिदा सा क्यूँ है…

शायरी

मोहब्बत कुछ अलग सी है मेरी तुझसे, तुम ख्यालों में ही नही दुआओं में भी रहते हो। मुझे किसी के बदल जाने का कोई गम नही,बस कोई था जिससे ये उम्मीद नही थी।