चुनिंदा शायरी
जो महसूस करते हैं वो बयाँ कर देते हैं,हमसे लफ़्ज़ों की दग़ाबाज़ी नहींं होती। आहिस्ता आहिस्ताआहिस्ता आहिस्ता बढ़ रहीं हैंचेहरे की लकीरें….!!शायद नादानी औरतजुर्बे मेंबंटवारा हो रहा है….!! दुरियां जब बढ़ी तो,गलतफैमियां भी बढ़ गई।फिर उसने वो भी सुना,जो मैने कहा ही नहीं। कुछ इस तरह से हमारीबातें अब कम हो गयीकैसे हो? से शुरू … Read more