चुनिंदा शायरी

जो महसूस करते हैं वो बयाँ कर देते हैं,हमसे लफ़्ज़ों की दग़ाबाज़ी नहींं होती। आहिस्ता आहिस्ताआहिस्ता आहिस्ता बढ़ रहीं हैंचेहरे की लकीरें….!!शायद नादानी औरतजुर्बे मेंबंटवारा हो रहा है….!! दुरियां जब बढ़ी तो,गलतफैमियां भी बढ़ गई।फिर उसने वो भी सुना,जो मैने कहा ही नहीं। कुछ इस तरह से हमारीबातें अब कम हो गयीकैसे हो? से शुरू … Read more

दिल ने शोर मचाया है -हाशिम फिरोज़ाबादी

गीत /हासिम फिरोजाबादी सांसों ने आवाज़े दी हैं दिल ने शोर मचाया हैतुम आये तो यूँ लगता है चाँद ज़मी पर आया है तितली उड़ना भूल गयी फूल महकना भूल गयेडाली डाली पंछी चुप हैं आज चहकना भूल गयेकितने दिल उलझे हैं इसमें ऐसा जाल बिछाया है सोच रहा हूँ तुझसे मिलकर अपने दिल की … Read more

शायरी :शानदार शायरी ,चुनिंदा शायरी पढ़े …….

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए – बशीर बद्र ——————————————— और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा -फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ ———————— रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ आ फिर … Read more

शायरी : सुनो ❤️साहिबा

सुनो ❤️साहिबा उठा लो दुपट्टे को ज़मीन से कहीं दाग़ न लग जाए पर्दे में रखा करो चेहरे❤️ कोअपनेजग में कही आग?न लग जाये…गर्ग जी ————————————————- बोल उठे लफ्ज किताबो से…..बोल उठे लफ्ज किताबो सेतुमसे मिलना तो है मुश्किलफिर क्यों प्यार झलकता है आंखों सेतुमसे मिलना तो है मुश्किल फिर क्यो प्यार झलकता है आखो … Read more

मैं अश्कों में बहतें तराने लिखूंगी -निधि चौधरी

मैं अश्कों में बहतें तराने लिखूंगी,बुरे दौर के कुछ फ़साने लिखूंगी। कि दुनिया हमारी है जालिम बहुत ही,वो मासूम दिखते सयाने लिखूंगी। सदाकत, रफ़ाक़त, मुहब्बत हमारी,ये सारे कुचलते ज़माने लिखूंगी। सिकंदर हज़ारों ज़माने में लेकिन,मैं हारे हुए दास्ताने लिखूंगी। इबादत है बिकती हां भक्ति भी बिकती,मैं सच बोलते वो मय’खाने लिखूंगी। ज़मीं से उठा के … Read more

परवीन शाकिर की तीन बेहतरीन रचनाएं

(१) उलझन रात भी तन्हाई की पहली दहलीज़ पे हैऔर मेरी जानिब अपने हाथ बढ़ाती हैसोच रही हूंउनको थामूंज़ीना-ज़ीना सन्नाटों के तहख़ानों में उतरूंया अपने कमरे में ठहरूंचांद मेरी खिड़की पर दस्तक देता है (२)बारिश बारिश में क्या तन्हा भीगना लड़की!उसे बुला जिसकी चाहत मेंतेरा तन-मन भीगा हैप्यार की बारिश से बढ़कर क्या बारिश होगी!और … Read more

पिंजरे में मुनिया – अकबर इलाहाबादी

मुंशी कि क्लर्क या ज़मींदार लाज़िम है कलेक्टरी का दीदार  हंगामा ये वोट का फ़क़त है मतलूब हरेक से दस्तख़त है हर सिम्त मची हुई है हलचलहर दर पे शोर है कि चल-चल टमटम हों कि गाड़ियां कि मोटरजिस पर देको, लदे हैं वोटर शाही वो है या पयंबरी हैआखिर क्या शै ये मेंबरी है … Read more