राजनीति बदली,नेता बदले, पर नही बदल सकी बिहार की किस्मत !!
सुशील जिस प्रकार वर्ष में नियमतः चार ऋतुओं का आगमन उनके समयानुसार होता दिखता है, उसी प्रकार बिहार की बदहाली बाढ़ रूपी त्रासदी ठीक साल में अपने समय पर उस कलंक गाथा को लिखने आ जाती है, जिसमे बेघर होते लोग, पनाह माँगते गरीब, भूख से परेशान बच्चे, उजड़ती खेती बाड़ी, नष्ट फसलों और महामारी … Read more