देश /डेस्क
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज लोकसभा में राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद के अभिभाषण पर चर्चा करते हुए कोरोना काल में सरकार के द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी देते हुए कोरोना वारियर्स की सराहना की साथ ही नए कृषि कानूनों पर भ्रम फैलाने के लिए विपक्ष पर भी हमला किया है और कहा कांग्रेस इसके कंटेंट पर चर्चा करती तो अच्छा होता साथ ही कहा कि कानून लागू होने के बाद ना तो एमएसपी खत्म हुई और ना ही मंडी यही सच्चाई है । श्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति जी का भाषण भारत के 130 करोड़ भारतीयों की संकल्प शक्ति को प्रदर्शित करता है।उन्होंने कहा विकट और विपरीत काल में भी ये देश किस प्रकार से अपना रास्ता चुनता है, रास्ता तय करता है और रास्ते पर चलते हुए सफलता प्राप्त करता है, ये सब राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में कही।
उन्होंने कहा मैं इस चर्चा में भाग लेने वाले सभी सांसदों का आभार व्यक्त करता हूं।मैं विशेष रूप से हमारी महिला सांसदों का आभार व्यक्त करना चाहता हूं।उन्होंने कहा देश जब आजाद हुआ, जो आखिरी ब्रिटिश कमांडर थे, वो आखिरी तक यही कहते थे कि भारत कई देशों का महाद्वीप है और कोई भी इसे एक राष्ट्र नहीं बना पाएगा।लेकिन भारतवासियों ने इस आशंका को तोड़ा।
विश्व के लिए आज हम आशा की किरण बनकर खड़े हुए हैं। पीएम ने कहा कि कुछ लोग ये कहते थे कि India was a miracle democracy. ये भ्रम भी हमने तोड़ा है।लोकतंत्र हमारी रगों और सांस में बुना हुआ है, हमारी हर सोच, हर पहल, हर प्रयास लोकतंत्र की भावना से भरा हुआ रहता है।पीएम ने कहाआज जब हम भारत की बात करते हैं तो मैं स्वामी विवेकानंद जी की बात का स्मरण करना चाहूंगा।”हर राष्ट्र के पास एक संदेश होता है, जो उसे पहुंचाना होता है, हर राष्ट्र का एक मिशन होता है, जो उसे हासिल करना होता है, हर राष्ट्र की एक नियति होती है, जिसे वो प्राप्त करता है।”जिन संस्कारों को लेकर हम पले-बढ़े हैं, वो हैं-सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामया।
कोरोना कालखंड में भारत ने ये करके दिखाया है।उन्होने कहा हमारे लिए आवश्यक है कि हम आत्मनिर्भर भारत के विचार को बल दें।ये किसी शासन व्यवस्था या किसी राजनेता का विचार नहीं है।आज हिंदुस्तान के हर कोने में वोकल फ़ॉर लोकल सुनाई दे रहा है।ये आत्मगौरव का भाव आत्मनिर्भर भारत के लिए बहुत काम आ रहा है। पीएम ने कहा हमारे लिए संतोष और गर्व का विषय है कि कोरोना के कारण कितनी बड़ी मुसीबत आएगी इसके जो अनुमान लगाए गए थे कि भारत कैसे इस स्थिति से निपटेगा।ऐसे मैं ये 130 करोड़ देशवासियों के अनुशासन और समर्पण ने हमें आज बचा कर रखा है।
इसका गौरवगान हमें करना चाहिए।भारत की पहचान बनाने के लिए ये भी एक अवसर है -पीएम
देश जब आजाद हुए तो आखिरी ब्रिटिश कमांडर यही कहते रहते थे कि भारत कई देशों का महाद्वीप है, कोई भी इसे एक राष्ट्र नहीं बना पाएगा। परन्तु भारतवासियों ने इस आशंका को तोड़ा। आज हम विश्व के सामने एक राष्ट्र के रूप में खड़े हैं और विश्व के लिए एक आशा की किरण हैं : PM मोदी, लोकसभा में
उन्होंने कहा ये हिन्दुस्तान है जो लगभग 75 करोड़ भारतीयों को कोरोना काल के दौरान 8 महीने तक राशन पहुंचा सकता है। कृषि कानून के रंग पर चर्चा हुई अच्छा होता मुद्दों पर चर्चा होती । किसान अफवाह के शिकार। किसानों को गुमराह किया गया ।
कोरोना कालखंड में जनधन खाते, आधार, ये सभी गरीब के काम आए। लेकिन कभी-कभी सोचते हैं कि आधार को रोकने के लिए कौन लोग सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे में गए थे -पीएम
कृषि क्षेत्र को कठिन चुनौतियों से बाहर लाने के लिए हमें प्रयास करना होगा ही।
इसके लिए हमने ईमानदारी से प्रयास किया है -पीएम
पीएम ने कहा मैं देख रहा था कि कांग्रेस के साथियों ने जो चर्चा की, वो इस कानून के रंग पर तो बहुत चर्चा कर रहे थे। अच्छा होता कि उसके कंटेट और इंटेट पर चर्चा करते। ताकि देश के किसानों तक सही चीजें पहुंचती।
पीएम ने कहा इस कोरोना काल में 3 कृषि कानून भी लाये गए।
ये कृषि सुधार का सिलसिला बहुत ही आवश्यक और महत्वपूर्ण है और बरसों से जो हमारा कृषि क्षेत्र चुनौतियां महसूस कर रहा है, उसको बाहर लाने के लिए हमें निरंतर प्रयास करना ही होगा और हमने एक ईमानदारी से प्रयास किया भी है।
पीएम ने कहा हम मानते हैं कि इसमें सही में कोई कमी हो, किसानों का कोई नुकसान हो, तो बदलाव करने में क्या जाता है।ये देश देशवासियों का है। हम किसानों के लिए निर्णय करते हैं, अगर कोई ऐसी बात बताते हैं जो उचित हो, तो हमें कोई संकोच नहीं है।उन्होंने कहा कानून लागू होने के बाद न देश में कोई मंडी बंद हुई, न एमएसपी बंद हुआ।ये सच्चाई है।इतना ही नहीं ये कानून बनने के बाद एमएसपी की खरीद भी बढ़ी है।
पीएम ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि संसद में ये हो-हल्ला, ये आवाज, ये रुकावटें डालने का प्रयास, एक सोची समझी रणनीति के तहत हो रहा है।रणनीति ये है कि जो झूठ, अफवाहें फैलाई गई हैं, उसका पर्दाफाश हो जाएगा।इसलिए हो-हल्ला मचाने का खेल चल रहा है।उन्होंने कहा कानून बनने के बाद किसी भी किसान से मैं पूछना चाहता हूं कि पहले जो हक और व्यवस्थाएं उनके पास थी, उनमें से कुछ भी इस नए कानून ने छीन लिया है क्या?इसका जवाब कोई देता नहीं है, क्योंकि सबकुछ वैसा का वैसा ही है।
मैं हैरान हूं पहली बार एक नया तर्क आया है कि हमने मांगा नहीं तो आपने दिया क्यों।दहेज हो या तीन तलाक, किसी ने इसके लिए कानून बनाने की मांग नहीं की थी, लेकिन प्रगतिशील समाज के लिए आवश्यक होने के कारण कानून बनाया गया- पीएम
मांगने के लिए मजबूर करने वाली सोच लोकतंत्र की सोच नहीं हो सकती है – पीएम
हमारे यहां एग्रीकल्चर समाज के कल्चर का हिस्सा रहा है। हमारे पर्व, त्योहार सब चीजें फसल बोने और काटने के साथ जुड़ी रही हैं – पीएम
पीएम ने कहा किसानों के आंदोलन को अपवित्र करने का काम किसानों ने नहीं आंदोलन जीबीयू ने किया है किसान आंदोलन को पवित्र मानता हूं लेकिन किसान आंदोलन में नक्सलियों देशद्रोहियों का फोटो लेकर उनके रिहाई की मांग करना क्या यह उचित है ।