Category: अररिया

  • अररिया : जिले में पल्स पोलियो अभियान की सफलता के लिये सभी जरूरी तैयारियां पूरी


    अभियान के दौरान 7 लाख 27 हजार बच्चों को पोलियो दवा पिलाने का है लक्ष्य

    पोलियो की दवा पिलाने के लिये 1401 टीकाकरण दल व 213 ट्रांजिट टीम का हुआ गठन

    अररिया /प्रतिनिधि


    जिले में प्लस पोलियो अभियान का दूसरा चरण 29 नवंबर से शुरू होने जा रहा है. इसकी सफलता को लेकर स्वास्थ्य विभाग जरूरी तैयारियों में जुट चुका है. ताकि अभियान के तहत शत प्रतिशत बच्चों को टीकाकरण सफलता पूर्वक संपन्न कराया जा सके. अभियान की सफतला में आशा, ऑगनबाड़ी सेविका समेत स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अन्य कर्मियों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गयी है. पोलियो चक्र की सफलता के लिये सुपरवाइजर, मॉनिटर समेत अन्य कर्मियों की टीम गठित की गयी है.

    जिले के सभी प्रखंडों में पिलाई जाएगी पोलियो की दो बूंद दवा:


    एसीएमओ डॉ सीपी मंडल ने से मिली जानकारी मुताबिक टीकाकरण अभियान का संचालन जिले के सभी प्रखंडों में किया जायेगा. इसे लेकर सभी जरूरी तैयारियों की जा रही है. शहरी क्षेत्र के टीकाकरण दल को जरूरी प्रशिक्षण का कार्य संपन्न हो चुका है. तो मंगलवार से जिले के सभी प्रखंडों में वर्क टीम का प्रशक्षण देने का कार्य शुरू किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान हर दिन वर्किंग टीम द्वारा सभी पीएचसी में अपना रिपोर्ट उपलब्ध करायेंगे. पीएचसी के माध्यम से रिपोर्ट जिला मुख्यालय को उपलब्ध कराया जायेगा.

    7 लाख 27 बच्चों के टीकाकरण है लक्ष्य:


    प्लस पोलियो अभियान के दौरान जिले के करीब सात लाख 27 हजार बच्चों को दवा पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसके लिये घर-घर जाकर बच्चों को दवा पिलाने के लिये कुल 1401 दल गठित किये गये हैं. टीकाकरण अभियान की सफलता के लिये 213 ट्रांजिट टीम बनाये गये हैं. इसके साथ ही 35 मोबाइल टीम का गठन किया गया है. अभियान की सफलता के लिये कुल 517 पर्यवेक्षक बहाल किये गये हैं.

    आशा व सेविका घर-घर जाकर बच्चों को पिलायेगी दवा:


    पोलिया टीकाकरण अभियान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को लगाया गया है. जो अपने पोषक क्षेत्र में घर-घर जाकर बच्चों को दवा पिलाने का काम करेगी. इतना ही नहीं दवा पिलाने के बाद बच्चों का नाम, बच्चे के माता-पिता का नाम, गृह संख्या सहित अन्य जानकारियां निर्धारित फार्मेट में भरकर विभाग को उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी उनके ऊपर सौंपी गयी है. पूरे दिन टीकाकरण से संबंधित रिपोर्ट शाम में संबंधित पीएचसी में जमा कराया जायेगा.

    बस व रेलवे स्टेशन पर टीकाकर्मी रहेंगे तैनात:


    यूनिसेफ के एसएमसी मुस्ताक आजम ने बताया कि अभियान के दौरान पांच साल तक के सभी बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने का लक्ष्य है. कोई बच्चा इससे वंचित नहीं रहे इसके लिये जरूरी तैयारियां की गयी है. अधिक से अधिक बच्चों को इस अभियान से जोड़ने के लिये शहर व गांव के व्यस्त चौक-चौराहे, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन सहित भीड़-भाड़ वाले अन्य जगहों पर टीकाकरण दल की प्रतिनियुक्ति की गयी है. जो बाहर से आने-जाने वाले बच्चों को दवा पिलाने का काम करेंगे. दवा पिलाने के बाद बच्चों के हाथों पर खास निशान लगाया जायेगा. ताकि एक बार दवा पिलाने के बाद किसी बच्चे को दोबारा दवा नहीं पिलायी जा सके.

    अभियान के दौरान कोरोना गाइडलाइन का होगा अनुपालन:

    टीकाकरण अभियान के दौरान सरकार व स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोरोना संक्रमण की रोकथाम को लेकर जारी गाइड लाइन का शत प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित कराया जायेगा. दवा पिलाने के दौरान कर्मी संक्रमण से खूद के बचाव का हर संभव उपायों पर अमल करेंगे. इसके लिये विभागीय अधिकारियों द्वारा कर्मियों को सभी जरूरी निर्देश दिये गये हैं.

  • अररिया :घर पर पर्व का आयोजन सुरक्षित, छठ घाटों पर भी होंगे सुरक्षा के विशेष इंतजाम

    अररिया /प्रतिनिधि

    हाई अलर्ट पर होंगे सभी सरकारी अस्पताल, स्वास्थ्य अधिकारी व कर्मी रहेंगे तैनात

    कंट्रोल रूम के माध्यम से घाटों की गतिविधियों पर रहेगी नजर, एंबुलेंस के साथ स्वास्थ्य कर्मी रहेंगे तैनात


    चार दिवसीय छठ महापर्व को लेकर सरगर्मी तेज हो गयी है. कोरोना संक्रमण के खतरों को देखते हुए जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग मुस्तैदी के साथ इसके आयोजन को सफल बनाने में की मुहिम में जुट चुका है. वैश्विक महामारी के दौर में आयोजित हो रहे इस महापर्व को लेकर सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा जरूरी गाइड लाइन जारी किेये गये हैं. गाइड लाइन में अधिक से अधिक लोगों को घरों में ही पर्व के आयोजन की अपील की गयी है. दस वर्ष से कम व साठ साल से अधिक उम्र के लोगों को घार पर आने से मना किया गया है. घर पर छठ मनाने के लिये लोगों को प्रेरित करने के लिये भी हर संभव कोशिश की गयी है. घाटों पर सुरक्षा के लिहाज से दंडाधिकारी व पुलिस बलों की तैनाती की गयी है.


    घाटों पर एंबुलेंस के साथ विशेष चिकित्सकीय दल तैनात रहेंगे।


    छठ पूजा को लेकर गठित जिला टास्क फोर्स कमेटी की बैठक में जिलाधिकारी ने छठ घाटों पर सभी जरूरी सुविधाओं की उपलब्ध सुनिश्चित कराने का आदेश संबंधित अधिकारियों को दिया है. इस संबंध में जानकारी देते हुए सदर एसडीओ शैलेश चंद्र दिवाकर ने कहा कि घाटों पर कोरोना प्रोटोकॉल के अनुपालन को लेकर लोगों को प्रोत्साहित व जागरूक करने का भी इंतजाम किया जायेगा. सभी बड़े घाटों पर गोताखारों के साथ-साथ मेडिकल टीम की प्रतिनियुक्ति का आदेश है. इसके अलावा दोनों अनुमंडल मुख्यालय के साथ-साथ जिला मुख्यालय में नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गयी है. नियंत्रण कक्ष में एंबुलेंस के साथ विशेषज्ञ चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मी के दल प्रतिनियुक्त किये गये हैं. ताकि किसी भी आपत स्थिति के दौरान प्रभावित जगहों पर तत्काल सभी जरूरी मदद उपलब्ध करायी जा सके.


    आपात स्थितियों से निपटने के लिये सभी अस्पताल रहेंगे अलर्ट:

    छठ महापर्व को लेकर स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों का हवाला देते हुए डीपीएम रेहान असरफ ने कहा कि वैश्विक महामारी के खतरों को देखते हुए इस बार घर पर ही पर्व का आयोजन सुरक्षित है. बावजूद इसके विभिन्न नदी घाटों पर पर्व मनाने के लिये आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा का सामना नहीं करना पड़े. इसके लिये स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष तैयारियां की गयी है. सभी छठ घाटों पर मेडिकल टीम प्रतिनियुक्त किये गये हैं. घाटों पर कोरोना जांच का भी इंतजाम होगा. बड़े छठ घाटों पर एंबुलेंस के साथ चिकित्सा अधिकारी व कर्मी तैनात रहेंगे. घाटों पर भीड़-भाड़ व आतिशबाजी सहित अन्य वजह से भगदड़ की संभावना की हमेशा बनी रहती है. इसके साथ ही गहरे पानी में डूबने से होने वाली मौत के मामलों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिये सदर अस्पताल विशेष तैयारियों के साथ पूरी तरह अलर्ट रहेगा. ताकि किसी भी संभावित परिस्थितियों से तत्काल निपटा जा सके.

    सामूहिक भागीदारी से हारेगा कोरोना, लोगों का अपेक्षित सहयोग जरूरी:

    सिविल सर्जन रूपनारायण कुमार ने कहा कि अस्थमा, टीबी व सांस रोग से पीड़ित लोगों के लिये घाटों पर जाना असुरक्षित है. नवजात व बीमार बच्चों को भी घाटों पर ले जाने से परहेज करने की जरूरत है. संक्रमण का खतरा अभी टला नहीं है. इसलिए छठ घाटों पर विशेष सतर्कता व सावधानी बरतने की जरूरत है. स्वास्थ्य विभाग द्वारा इसके लिये जरूरी तैयारियां की गयी है. लेकिन कोरोना महामारी को मात देने में सामूहिक भागीदारी जरूरी है. इसलिए आम लोगों का इसमें अपेक्षित सहयोग जरूरी है.

    सरकारी गाइडलाइन में है यह निर्देश:

    -घाटों पर जागरूकता फैलाने के लिये प्रचार प्रसार सामग्री का प्रयोग होगा।

    -पब्लिक एड्रेस सिस्टम के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का भी प्रयास किया जाएगा।

    • मेला, सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यक्रम के आयोजन पर पाबंदी होगी।

    -जहां तहां थूकने पर पाबंदी होगी

    -बैरिकेडिंग की मदद से पानी में डूबकी लगाने से रोकने का प्रयास होगा

    -बैठने व खड़े रहने के दौरान सोशल डिस्टैसिंग का पालन होगा जरूरी

    -घाटों पर खाद्य पदार्थ के स्टॉल लगाने पर होगी रोक

    -जारी निर्देश के उल्लघंन पर आपता प्रबंधन अधिनियम के तहत होगी कानूनी कार्रवाई

  • किशनगंज :दीपावली के इस त्यौहार पर खुशियां बांटे, संक्रमण का वायरस नहीं

    • गिफ्ट में दें मास्क व सेनिटाइजर, संक्रमण के प्रति करें जागरूक
    • त्यौहार पर संक्रमण से सुरक्षा के प्रति नहीं हों लापरवाह
    • सेनिटाइजर को आग से दूर रखें, पटाखे चलाने से भी बचें
    • मेहमान घर आयें तो साबुन पानी से धुलवायें हाथ, दें ऑनलाइन बधाई

    किशनगंज, 12 नवंबर:
    जगमग रोशनी का त्यौहार दीपावली दीयों के साथ खुशियां के आगमन का संकेत देने वाली है. दीपावली व लोक आस्था के त्यौहार छठ को लेकर लोग घर आने वाले अपनों के इंतजार में है. बाजार में खरीदारी कर रहे हैं और मिलने जुलने वालों के स्वागत की तैयारी में भी जुटे हैं. लेकिन यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि कोविड संक्रमण काल से पूर्व की तरह इस बार की दीपावली बिल्कुल अलग है. इस दीपावली को कई मायनों में हमें ख़ास बनाना होगा. दीपावली का पर्व अंधेरों पर प्रकाश की जीत का है. अभी के दौर में कोविड-19 अंधेरों का पर्याय बनने को आतुर भी दिख रहा है. लेकिन हम थोड़ी सतर्कता एवं सावधानी से उजालों के पर्व दीपावली को संक्रमण मुक्त कर सकते हैं एवं त्यौहार की खुशी लोगों के साथ साझा कर सकते हैं. इसके लिए हमें संक्रमण के प्रति एहतियात बरतने की सख्त जरूरत है. इसमें विशेषकर हाथ धोने, मास्क पहनने और दीपावली जैसे त्योहार पर भी 6 फीट की दूरी रखने जैसे नियमों का पालन जरूरी है.

    दीपावली पर खुशियां बांटे, वायरस नहीं:

    दीपावली को लेकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने पोस्टर जारी करते हुए दीपावली व छठ जैसे त्यौहारों पर बरती जाने वाली उपायों का आवश्यक रूप से ख्याल रखने की अपील की है. मंत्रालय ने अपील किया है कि इस घड़ी में हमें खुशियां बांटनी हैं ना कि वायरस और इसके लिए आवश्यक उपायों का पालन जरूर करें. यदि आपके पास मोबाइल फोन, लैपटॉप है तो इसके माध्यम से आॅनलाइन अपने रिश्तेदारों को दीपावली की बधाई दे सकते हैं.

    सेनिटाइजर के इस्तेमाल के प्रति रहें सचेत:

    दीपावली पर सेनिटाइजर के इस्तेमाल के प्रति सचेत रहना जरूरी है. सैनिटाइजर में एल्कोहल होता है. यह आग तेजी से पकड़ता है. दीपक जलाने से पहले इसका इस्तेमाल नहीं करें. आतिशबाजी से दूरी बनायें. यदि दीप जला रहे हों तो सैनिटाइजर को अपने साथ नहीं रखें. इसे आग से दूर सुरक्षित स्थान पर रखें. इस मौके पर घर में बनाये गये या डिब्बाबंद मिठाईयों का इस्तेमाल करें. दीपावली पर यदि घर पर कोई मेहमान पहुंचते है तो सबसे पहले साबुन पानी से हाथ धुलवायें. गले नहीं लगें व इसकी जगह उनका अभिवादन हाथ जोड़ कर करें. यदि उनके द्वारा कोई गिफ्ट दिया जाता है तो उसे सेनिटाइज कर लें.

    सिविल सर्जन डॉ श्री नंदन ने कहा कि दीपावली में पटाखों के चलाने से उत्पन्न वायु प्रदूषण व्यक्ति के श्वसन तंत्रिका को प्रभावित करती है। जिससे वैसे लोग जो पहले से सांस संबंधी व्याधियों से ग्रसित हैं उनके लिए यह प्रदूषण काफी खतरनाक है। कोविड- 19 के वायरस जो हमारे श्वसन तंत्रिका को ही प्रभावित करती है, उसके लिए भी आवश्यक है कि कम से कम पटाखे चलाये जायें। किसी भी तरह से श्वसन तंत्रिका का संक्रमित या कमजोर हो जाना हमारे लिए घातक हो सकता है।

    सुरक्षित रहने के लिए इसका भी रखें ध्यान:

    • घर पर ही रहकर दीपावली मनायें.
    • तोहफा के आदान प्रदान को लेकर सर्तक व सजग रहें.
    • कम भीड़भाड़ वाले समय में ही खरीदारी करें.
    • आवश्यक सामानों की लिस्ट बनाकर एक ही दूकान से खरीदारी करें.
    • बहुत अधिक बाजार घूम घूम कर खरीदारी करने से बचें.
    • गिफ्ट में मास्क, सेनिटाइजर देकर संक्रमण के प्रति करें जागरूक

  • मतदान में संक्रमण के खतरों पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर स्वास्थ्य विभाग का प्रयास सराहनीय

    अररिया /संवादाता

    चुनाव को लेकर गठित सभी सेक्टर में तैनाती दिखी
    एएनएम, सभी 2732 बूथों पर आशा, एएनएम व आंगनबाड़ी कर्मी थे प्रतिनियुक्त


    मतदान के बाद कचरा प्रबंधन को लेकर सजग दिखा विभाग, कर्मियों ने निष्ठापूर्वक निभायी जिम्मेदारी


    कोरोना संक्रमण के खतरों के बीच संपन्न विधानसभा चुनाव के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी जिम्मेदारियों का सफलता पूर्वक निवर्हन किया। जिले में सफलता पूर्वक चुनाव संपन्न कराने में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व कर्मियों का प्रयास सराहनीय रहा। चुनाव प्रक्रिया आरंभ होने के बाद से ही आयोग से लेकर वरीय प्रशासनिक अधिकारियों की नजर स्वास्थ्य विभाग पर टिकी हुई थी। स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों को चुनाव के दौरान महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का निवर्हन करना था। स्वास्थ्य कर्मियों ने कार्य के प्रति अपने समर्पण व कड़ी मेहतन के दम पर इसे पूरा कर दिखाया।

    शुरुआत में लोगों के मन में था एक डर


    समाजसेवी सत्येंद्रनाथ शरण कहते हैं कि शुरू से ही लोगों के मन में बूथों पर कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिये प्रशासनिक तौर पर किये जाने वाले इंतजाम को लेकर मन में संदेह व्याप्त था। लेकिन मतदान के निर्धारित तिथि को उनके इस संदेह पर विराम लग गया। अमूमन सभी बूथों पर स्वास्थ्य कर्मी तैनात दिखे। उन्होंने बूथों पर पहुंचने वाले आम मतदाताओं की थर्मल स्क्रीनिंग, सैनिटाइजिंग व उन्हें मतदान के लिये ग्लब्स प्रदान करने के कार्य को बखूबी निभाया। स्वास्थ्य कर्मियों ने ईमानदारी पूर्वक अपने कर्तव्यों का निवर्हन किया जो नि:संदेह सराहनीय है।

    पर्यावरण व स्वास्थ्य मामलों के प्रति दिखायी संवेदनशीलता-


    पर्यावरणविद सूदन सहाय ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुपालन में जिलाधिकारी के दिशा-निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों ने काफी मुस्तैदी दिखायी। अमूमन सभी बूथों पर संक्रमण से बचाव को लेकर जरूरी इंतजाम किये गये थे। जो खास बात मतदान के दौरान देखने को मिला वो था बायोवेस्ट के निपटारे का इंतजाम। इसके लिये आयोग के स्तर से स्वास्थ्य विभाग द्वारा जरूरी इंतजाम किया गया था। आम लोग भी इसे लेकर बेहद जागरूक दिखे। उन्होंने बायोवेस्ट को इधर-उधर नहीं फेंक कर निर्धारित डस्टबीन में ही इसे फेंका ताकि इसका निस्तारण सही से हो सके। ये एक अच्छी पहल थी। हम सबों को अपने पर्यावरण संरक्षण के उपायों के प्रति गंभीर होना होगा।

    सामूहिक प्रयास व भागीदारी से सब कुछ संभव-


    डीपीएम स्वास्थ्य रेहान असरफ ने कहा कि आयोग द्वारा जारी गाइडलाइन के आधार पर जिला प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य विभाग को चुनाव संबंधी जो भी जिम्मेदारियां सौंपी गयी इसे विभागीय कर्मियों के सामूहिक प्रयास व भागीदारी के दम पर पूरा किया गया। निर्धारित समय पर बूथों के आगे जमा बायोवेस्ट का उठाव कर लिया गया। निस्तारण के लिये इसे बंद वाहनों से विभाग से संबंद्ध सैलरजी बायोगैस मैनजमेंट भेजा जायेगा ताकि इसका सफलता पूर्वक निस्तारण हो सके।

  • अररिया : लक्ष्य प्रमाणीकरण के लिये सदर अस्पताल में उपलब्ध प्रसव संबंधी सुविधाओं का रिजनल टीम ने किया निरीक्षण

    अररिया /संवादाता


    • निरीक्षण कर अस्तपाल के अधिकारियों व कर्मियों को दिये जरूरी सुझाव
    • सदर अस्पताल में गुणवत्तापूर्ण प्रसव संबंधी सेवा उपलब्ध कराने का हो रहा हर संभव प्रयास


    सदर अस्पताल अररिया को जल्द ही लक्ष्य प्रमाणीकरण हासिल हो सकता है. इसे लेकर सदर अस्पताल प्रशासन व केयर इंडिया की टीम द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा है. अस्पताल में प्रसव से जुड़ी सेवाओं को सुदृढ़ करने का प्रयास किया जा रहा है. इसके लिये केयर इंडिया रिजनल प्रोग्राम टीम द्वारा लगातार अस्पताल का निरीक्षण किया जा रहा है. प्रसव सेवाओं में सुधार के लिये जरूरी कदम उठाये जा रहे हैं.


    दो दिवसीय निरीक्षण कार्यक्रम के तहत सदर अस्पताल पहुंचे रिजनल टीम का नेतृत्व कर रहे क्षेत्रीय प्रबंधक नजमुल होदा ने बताया कि निरीक्षण के क्रम में सदर अस्पताल में सुरक्षित प्रसव के लिये उपलब्ध संसाधनों का बारिकी से मुआयना किया गया. प्रसव गृह से संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की गयी. साथ ही अस्पताल के अधिकारियों व कर्मियों से लक्ष्य प्रमाणीकरण से संबंधित महत्वपूर्ण पहलूओं पर विस्तृत चर्चा की गयी. इस दौरान केयर इंडिया की डीटीएल पर्णा चक्रवती, मेंटर मीरनवा, क्वालिटी कंल्सटेंट मधुबाला, अस्पताल प्रबंधक विकास आनंद सहित अन्य मौजूद थे.

    लक्ष्य प्रमाणीकरण से सुरक्षित प्रसव को मिलेगा बढ़ावा

    केयर इंडिया की डीटीएल पर्णा चक्रवती ने बताया कि लक्ष्य प्रमाणीकरण का मूल उद्देश्य प्रसव संबंधी सुविधाओं को बेहतर बनाना है. साथ ही इससे जुड़ी सेवाओं के गुणवत्ता में सुधार लाना है. जिले में मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने, डिलीवरी के दौरान व इसके तत्काल बाद जच्च बच्चा को बेहतर स्वास्थ्य देखभाल की सुविधा के लिहाज से लक्ष्य प्रमाणीकरण खासा महत्वपूर्ण है. बच्चों के जन्म के समय विकलांगता का खतरा सबसे अधिक होता है. इसे देखते हुए स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा लक्ष्य कार्यक्रम की शुरूआत की गयी है. इसके तहत प्रसव कक्ष, मैटरनिटी ऑपरेशन थियेटर व प्रसूता के लिये बने विशेष देखभाल इकाई के गुणवत्ता में सुधार लाना है.

    निरीक्षण कर जरुरी सुधार की जरूरत पर दी जानकारी

    रिजनल टीम द्वारा निरीक्षण के नतीजों की जानकारी देते हुए क्षेत्रीय प्रबंधक नजमुल हौदा ने बताया कि निरीक्षण के दौरान लेवर रूम के कुछ दस्तावेजों को अद्यतन व अपडेट करने की जरूरत महसूस की गयी. जिम्मेदार कर्मी व नर्श को इसके लिये जरूरी निर्देश दिये गये हैं. साथ ही केयर के डीटीओएफ को इसकी नियमित निगरानी करने को कहा गया है. इस क्रम में सदर अस्पताल में कुछ जरूरी दवाओं का अभाव पाया गया. अस्पताल प्रबंधक को मेडिसीन स्पलाई चेन को मेंटन करने का निर्देश दिया गया है. इस दौरान सदर अस्पताल के शौचालय कक्ष एवं आईईसी मेटेरियल में जरुरी सुधार के निर्देश दिए गए हैं. केयर की डीटीएल को प्रसव वार्ड के कर्मियों को नियमित प्रशिक्षण व उनके कार्यों की मोनेटरिंग का निर्देश दिया गया है. निरीक्षण के नतीजों से स्वास्थ्य अधिकारियों को अवगत कराते हुए जल्द से जल्द इन कमियों को दूर करने की अपील भी उनसे की गयी है.

    त्रिस्तरीय जांच के उपरांत लक्ष्य प्रमाणीकरण की है सुविधा

    लक्ष्य प्रमाणीकरण की विस्तृत जानकारी देते हुए क्षेत्रीय प्रबंधक नजमूल हौदा ने बताया कि लक्ष्य कार्यक्रम के तहत भारत सरकार द्वारा प्रसव कक्ष व मेटरिनिटी ओटी के लिये प्रमाणीकरण की व्यवस्था की गयी है. जो मानक स्तर पर प्रसव संबंधी तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराने के बाद ही दी जाती है. तीन स्तरों पर प्रमाणीकरण की व्यवस्था की गयी है. सबसे पहले अस्पताल स्तर पर क्वालिटी सर्किल टीम, दूसरा जिला स्तर पर जिला गुणवत्ता यकीन समिति, रिजनल स्तर पर रिजनल कोचिंग टीम के स्तर से निरीक्षण के उपरांत निर्धारित मानकों के आधार पर 70 प्रतिशत उपलब्धि प्राप्त होने के उपरांत इसे राज्यस्तर पर प्रमाणीकरण के लिये अग्रसरित किया जाता है. इसके उपरांत राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा गठित टीम द्वारा प्रसव कक्ष व ओटी का निरीक्षण व ओडिट किया जाता है. ओडिट में कम से कम 70 प्रतिशत मानक अंक प्राप्त होने पर राज्य स्तर पर प्रमाणीकृत कर दिया जाता है. राज्य इसके बाद प्रमाणीकरण के लिेय राष्ट्रीय स्तर की टीम के पास अग्रसरित किया जाता है. फिर राष्ट्रीय स्तर की टीम अस्पताल का निरीक्षण व ओडिट करती है. कम से कम 70 प्रतिशत अंक पर लक्ष्य प्रमाणीकरण प्राप्त हो जाता है. इसे सिलवर प्रमाणीकरण माना जाता है. 70 से 80 प्रतिशत अंक प्राप्त होने पर सिलवर, 80 प्रतिशत से 90 प्रतिशत मानक अंक प्राप्त होने पर उसे गोल्ड व 90 से ऊपर मानक अंक प्राप्त होने पर प्लेटिनम सर्टिफिकेशन दिया जाता है. इसमें रोगी कल्याण समिति को निर्धारित राशि उपलब्ध कराने का प्रावधान है. इसमें 25 प्रतिशत राशि कर्मियों के लिये इंसेंटिव व बांकी 75 प्रतिशत राशि अस्पताल के व्यवस्थाओं को सुदृढ करने के लिये सीधे अस्पताल को उपलब्ध कराये जाते हैं.

  • बदलते मौसम में लोगों को अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखने की है जरूरत

    अररिया /संवादाता

    वायरल फीवर, कोल्ड डायरिया, खांसी व सर्दी-जुकाम से सतर्क रहने की जरूरत


    बदलते मौसम में अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। ठण्ड को देखते हुए वायरल फीवर, कोल्ड डायरिया, खांसी व सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियों से सतर्क रहने की जरूरत है। सदर अस्पताल सहित जिले के अन्य अस्पतालों में हर दिन मौसमी बीमारियों से पीड़ित लोगों के इलाज के लिये आना जारी है ।

    सदर अस्पताल के ओपीडी में हर दिन इलाज के लिये पहुंचने वाले औसतन आठ सौ से हजार मरीजों में 70 प्रतिशत लोग मौसमी बीमारी की गिरफ्त में देखे जा रहे हैं। इलाज के लिये अस्पताल पहुंचने वाले ज्यादातर मरीज बुखार, सर्दी-जुकाम के साथ कोल्ड डायरिया की चपेट में होते हैं।

    विशेषज्ञ चिकित्सक इस बदलते मौसम में लोगों को अपनी सेहत का विशेष ख्याल रखने सलाह देते हैं।


    अपने पहनावे व खान-पान पर रखें विशेष ध्यान-


    सदर अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक जीतेंद्र प्रसाद ने बताया कि बदलते मौसम में लोगों को सुबह व रात में अपने पहनावे पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। दिन अमूमन गर्म होता है तो लोग कम कपड़े पहन कर अपने घरों से काम पर निकलते हैं। लेकिन शाम को लौट कर घर पहुंचते-पहुंचते मौसम ठंडा हो चुका होता है। इसके लिये लोगों का पहले से तैयार रहना जरूरी है।

    वे खान-पान में इन दिनों ठंडी चीजों से परहेज करने की भी सलाह देते हैं। उनके मुताबिक बच्चों को सुबह बेड से उठकर सीधे बाहर नहीं जाने दें। सुबह फर्श पर नंगे पांव चलने से परहेज करें। बच्चों को भी इसके लिये रोकें। अमूमन लोग इस मौसम में कम पानी का सेवन करते हैं जो बेहतर स्वास्थ्य के लिहाज से गलत है। इससे डिहाइड्रेशन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। कोल्ड डायरिया की चपेट में आने का भी इससे खतरा होता है। इसलिये संभव हो सके उतना स्वच्छ पानी का सेवन जरूरी है।


    बीमारियों से बचाव को अपने आस-पास रखें स्वच्छता का ध्यान


    सिविल सर्जन डॉ रूपनारायण कुमार ने कहा कि बुखार पीड़ित कई मरीजों में मलेरिया के लक्षण भी उजागर हो रहे हैं। इससे बचाव के लिये अपने आस-पास की सफाई पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। यह ख्याल रखना खास तौर पर जरूरी है कि घर के आसपास पानी का जमाव नहीं हो ताकि इनमें मलेरिया के मच्छर न पनप सके। इसके अलावा हमें अपने दैनिक जीवन में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना होगा। हमेशा ताजा खाना व स्वच्छ पेयजल का सेवन हमें इस तरह के कई बीमारियों से बचा सकता है। ठंड के मौसम में छोटे उम्र के बच्चों में निमोनिया व बुजुर्गों को पक्षाघात का खतरा अधिक रहता है। इसलिये उनका विशेष ध्यान रखना जरूरी है। घर से बाहर निकलते वक्त गर्म कपड़ों का इस्तेमाल जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने पानी व दूध हमेशा उबाल कर पीने की सलाह दी।


    खांसी व सांस लेने तकलीफ होने पर कोरोना संबंधी जांच जरूरी


    विशेषज्ञ चिकित्सकों की मानें तो बदलते मौसम में कोरोना का खतरा भी अधिक है। दोनों के लक्षण सामान हैं। अगर किसी व्यक्ति को चार दिन या इससे अधिक समय से सर्दी-खांसी, बुखार, सांस लेने में तकलीफ सहित अन्य तरह की समस्या का सामना करना पड़ रहा है तो फिर उन्हें बिना कुछ सोचे कोरोना संक्रमण से संबंधित जांच करानी चाहिये। ताकि समय पर इसकी पहचान हो सके और इसका समुचित इलाज किया जा सके। कोरोना महामारी से संक्रमित व्यक्ति ही नहीं बल्कि उनके संपर्क में आने वाले उनके परिचित, करीबी व रिश्तेदारों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। लिहाजा जांच को लेकर लोगों के मन में किसी प्रकार की कोई दुविधा नहीं होनी चाहिये।


    मौसमी बीमारियों से बचाव के लिये रखें इन बातों का ध्यान
    मौसमी बीमारियों की चपेट में आने से बचाव के लिये युवा व बुजुर्गों को थोड़े-थोड़े समयांतराल के बाद हल्का भोजन लेना चाहिये। हमेशा ताजा भोजन ही व्यवहार में लाना चाहिये। सुबह व शाम हल्का गर्म कपड़ों का इस्तेमाल बीमारी से बचाव के लिहाज से महत्वपूर्ण है। ब्लडप्रेशर, डायबिटिज के मरीजों को नियमित रूप से अपना स्वास्थ्य जांच कराना अनिवार्य है। फ्रिज के ठंडा पानी के इस्तेमाल से परहेज करना चाहिये।

  • अररिया :लॉकडाउन के दौरान कंटेनमेंट जोन ही नहीं, संक्रमित व्यक्ति के घरों तक पहुंचाया गैस सिलिंडर

    कोरोना संकट के दौर ने छोटे काम करने वालों की अहमियत को किया साबित

    डिलीवरी ब्वॉय ने सफलता पूर्वक निभायी अपनी जिम्मेदारी

    अररिया /संवादाता

    कोरोना संक्रमण काल ने एक तरफ़ स्वास्थ्य कर्मियों की उपयोगिता को उजागर किया तो दूसरी तरफ़ छोटे कामगारों के महत्व को भी सामने लाया है। फिर चाहे वह घर में काम करने वाली बाई हो या कचरा उठाने वाला कर्मचारी व जरूरत के सामान आपके घरों तक पहुंचाने वाला डिलीवरी ब्वॉय. कोरोना संक्रमण का यह दौर कुछ हद तक इनके प्रति लोगों की दृष्टिकोण एवं मानसिकता में बदलाव लाने में कारगर रहा है. वैश्विक महामारी के इस दौर में अधिकांश लोगों को इनका महत्व समझाने में बखूबी सफल रहा. हममें से कई लोगों ने पिछले दिनों इस बारे में जरूर सोचा होगा कि वह व्यक्ति जो हर दिन सुबह शाम हमारे नल की सप्लाई शुरू करता है. जो हर दिन हमारे गली मुहल्ले का कचरा उठाता है. या फिर वह व्यक्ति जो हमारे घरों तक गैस सिलिंडर पहुंचाता है. वह महज कुछ दिनों तक अगर ऐसा करना बंद कर दें तो हमारा क्या होगा. कोरोना संक्रमण के इस दौर में बड़े फैसले व महत्वपूर्ण काम करने वाले ज्यादातर लोग जब अपने घरों में कैद थे. तब भी बहुत से मूलभूत काम पूर्व की तरह ही संचालित हो रहे थे.

    लॉकडाउन के दौरान लोगों के घरों तक रसोई गैस सिलिंडर की पहुंच सुनिश्चित कराना भी एक ऐसा ही काम था. हम अपने घरों में बैठकर मोबाइल व इंटरनेट की मदद से सिलिंडर बुक कराते थे. फिर इसे घरों तक पहुंचाने का कार्य डिलीवरी ब्वॉय के माध्यम से हो रहा था. बफर जोन या कंटनमेंट जोन या फिर अइसोलेशन सेंटर तक सिलिंडर की उपलब्धता सुनिश्चित कराना इन डिलीवरी ब्वॉय के जिम्मे था. जबकि उन्हें भी हमारी तरह ही सेहत से जुड़ी चिंताएं थी. खुद के संक्रमित हो जाने पर अपने परिजन व घर के छोटे बच्चे की सेहत से जुड़ी चिंताएं उन्हें भी परेशान करता रहता था. बावजूद इसके उन्होंने कभी अपनी जिम्मेदारियों से मूंह नहीं मोड़ा. ताकि आपके घरों का चूल्हा हमेशा जलता रहे. आपके परिवार के बुढ़े-बुजुर्ग व छोटे बच्चों को भूख के कारण परेशानी का सामना नहीं करना पड़े. जिले में जब कोरोना संक्रमण का दौर अपने चरम पर था. उस दौर में भी लोगों के घरों तक गैस सिलिंडर की आपूर्ति पूर्व की तरह ही जारी था. जो इन डिलीवरी ब्वॉज के अथक परिश्रम, अपने कार्य व जिम्मेदारी के प्रति निष्ठा का भाव व लोगों की सेवाओं के प्रति इनकी तत्परता की वजह से ही संभव हो पाया.

    कंटेनमेंट जोन व संक्रमित के घरों तक सिलिंडर पहुंचाने की थी चुनौती

    संक्रमण काल के उस दौर को याद करते हुए सिलिंडर डिलीवरी का काम करने वाले दिलीप कुमार बताते हैं कि लॉकडाउन की घोषणा के बाद से ही सिलिंडर की मांग काफी बढ़ गयी. सिलिंडर के लिये हर दिन सैकड़ों लोगों का फोन आता था. एक बार में मुश्किल से दस-बारह सिलिंडर की डिलीवरी के लिये ले जाया जा सकता था. तो ऐसे में कई बार एजेंसी के गोदाम से भरे सिलिंडर का उठाव कर लोगों के घरों तक इसे पहुंचाना होता था. सुबह नौ बजे से शाम पांच-छह बजे तक यह सिलसिला अनवतर चलता रहता था. इस क्रम में उन्हें किसी संक्रमित व्यक्ति के घर तो कंटेनमेंट जोन वाले इलाकों में भी डिलीवरी देनी होती थी. लेकिन लोगों को इस मुश्किल घड़ी में ऐसे ही नहीं छोड़ा जा सकता था. संक्रमण का खतरा हमेशा बरकरार रहता था. अपने स्तर से संक्रमण से बचाव के लिये जो बन पाता था करने के बावजूद घर में बीबी, बाल-बच्चे व बुजुर्ग माता-पिता की चिंता भी परेशान करता रहता था. वह बताते हैं उन्हें यह भी डर होता था कि उनकी वजह से उनके घर वाले महामारी की चपेट में नहीं आ जायें. लेकिन इन सारी चिंताओं का दरकिनार करते हुए अपना काम जिम्मेदारी पूर्वक करता रहा. ताकि कहीं किसी घर में कोई बुजुर्ग या बच्चे को भूखा न रहना पड़े.

    लोगों का तिरस्कार झेलते हुए भी निभायी अपनी जिम्मेदारी

    सिलिंडर डिलीवरी का काम करने वाले दिलीप, राजकुमार एवं मो मंजूर सहित ने बताया कि संक्रमण के उस दौर में कई बार उन्हें सिलिंडर डिलीवरी देने क्रम में लोगों के तिरस्कार व अपमान का सामना करना पड़ा. डिलीवरी लेकर लोगों के घर पहुंचने पर वह बाहर ही रूकने पर जोर देते थे. इतना ही नहीं लोग पैसा हमारे आगे फेंक कर दिया करते थे. कुछ तो ऐसे भी होते थे कि वह सिलिंडर का उचित दाम देने व हमें अपना मेहनताना देने में भी आनाकानी करते थे. लेकिन कभी किसी बात को लेकर मन में किसी तरह का मलाल नहीं पाला. उन्होंने बताया कि उन्हें अपनी जिम्मेदारी व काम का निवर्हन निष्ठा पूर्वक करना था. डिलीवरी के लिेये सुबह घर से सोच कर निकलता था कि किसी भी बात का बूरा नहीं मानना है. सिर्फ अपने काम पर ध्यान देना है. कुछ लोग ऐसे भी होते थे कि समय पर उनके घर डिलीवरी पहुंचाने पर वे आशीष व शुभकामनाएं भी देते थे. भले ही ऐसे लोग संख्या में कम थे. लेकिन उनकी बातें व व्यवहार से मन खुश हो जाया करता था.

    फिलहाल टला नहीं है संकट का दौर, है विशेष सावधानी की जरूरत

    संक्रमण का वह दौर हम सभी के लिेये बेहद चुनौतीपूर्ण था. कोरोना संक्रमण का दौर फिलहाल टला नहीं है. इसलिये इसे लेकर अब भी पर्याप्त सावधानी बरतने की जरूरत है. दिलीप कहते हैं – वह अपने काम के दौरान अब भी संक्रमण से बचाव के तौर-तरीकों का पूरा ध्यान रखते हैं. हर लोगों को ऐसा करना चाहिये. उन्हें नियमित रूप से मास्क का सेवन, थोड़े-थोड़े समयांतराल बाद अपने हाथों की सफाई, भीड़-भाड़ वाले स्थानों से परहेज करने की जरूरत तब तक है. जब तक कोरोना बीमारी का कोई सफल इलाज सामने नहीं आ जाता है.

  • अररिया : मताधिकार के प्रयोग के लिये लोगों को प्रेरित कर रहीं हैं आंगनबाड़ी सेविका व सहायिकाएं

    अररिया /संवादाता

    स्वीप अभियान के तहत जिले में संचालित मतदाता जागरूकता अभियान के संचालन में आईसीडीएस कर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण

    • अभियान में महिलाओं को सही पोषण व संक्रमण से बचाव के उपायों को लेकर किया जा रहा जागरूक


    विधानसभा चुनाव के आखिरी चरण में आगामी 07 नवंबर को जिले के सभी छह विधानसभा सीटों पर मतदान की प्रक्रिया संपन्न होगी। मतदान में शत-प्रतिशत मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित कराने के लिये जिला प्रशासन द्वारा संचालित स्वीप अभियान के तहत जागरूकता संबंधी विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों में तमाम सरकारी महकमा अपनी सहभागिता निभा रहा है।

    मतदाताओं को जागरूक करने को लेकर संचालित विभिन्न गतिविधियों में आईसीडीएस कर्मियों की भूमिका सराहरनीय है। आईसीडीएस की डीपीओ, महिला पर्यवेक्षिकाएं सहित आंगनबाड़ी केंद्रों पर कार्यरत सेविका व सहायिकाएं इन अभियान में बढ़-चढ़ कर अपनी भागीदारी निभा रही हैं ।

    आंगनबाड़ी सेविका व सहायिकाओं द्वारा सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों से लेकर प्रखंड व जिला मुख्यालय स्तर पर रैली, संगोष्ठी, चौपाल सहित अन्य आयोजनों के माध्यम से क्षेत्र के लोगों को मतदान की प्रक्रिया में शत- प्रतिशत अपनी भागीदारी निभाने के लिये प्रेरित किया जा रहा है। इस दौरान उन्हें कोरोना संक्रमण से बचाव के उपायों को लेकर चुनाव आयोग द्वारा जिले के सभी बूथों पर किये जाने वाले इंतजाम की भी जानकारी दी जा रही है । साथ हीं अशिक्षित ग्रामीण महिलाओं को अपने व अपने बच्चों के सही पोषण के तौर-तरीकों व इसके लिये जरूरी खान-पान की आदतों के प्रति भी प्रेरित व जागरूक किया जा रहा है।

    वोटिंग के दौरान संक्रमण से बचाव के उपायों के प्रति किया जा रहा जागरूक


    सीडीपीओ अररिया तनूजा साह ने बताया कि पंचायत से लेकर प्रखंड व जिलास्तर पर मतदाता जागरूकता संबंधी कार्यक्रमों में संबंधित प्रखंड की एलएस व आंगनबाड़ी कर्मी बढ़ चढ़ कर भाग ले रहीं हैं। सभी पंचायतों में जागरूकता रैली, साइकिल रैली, कैंडिल मार्च सहित तमाम तरह के आयोजन किये गये हैं। इसमें मतदाताओं को वोटिंग के लिये जागरूक करने के साथ-साथ कोरोना संक्रमण से बचाव व लोगों को सही पोषण के प्रति जागरूक करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। खासकर ग्रामीण स्तर पर आयोजित संगोष्ठी, चौपाल व आम बैठकें जहां क्षेत्र की महिलाओं का ज्यादा जुटान होता है, वहां संक्रमण से बचाव को लेकर आयोग द्वारा किये जा रहे विशेष इंतजाम,महिला व उनके नवजात के बेहतर स्वास्थ्य के लिये उन्हें सही पोषण से संबंधित जानकारी उपलब्ध करायी जा रही है। ताकि जिले में मतदान के दौरान कोरोना संक्रमण के फैलाव पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।


    बेहतर पोषण व संपूर्ण टीकाकरण के महत्व की दी जा रही जानकारी-


    आईसीडीएस की महिला पर्यवेक्षिका सत्यम कंचन ने कहा कि अभियान के क्रम में लोगों को अपने घरों में पोषण वाटिका लगाने, हरी साग सब्जी का अधिक उपयोग, छह माह से अधिक उम्र के बच्चों को मां के दूध के साथ ऊपरी आहार के महत्व की समुचित जानकारी दी जा रही है। इसके अलावा गर्भवस्था के दौरान नियमित स्वास्थ्य जांच व नवजात के बेहतर स्वास्थ्य के लिये संपूर्ण टीकाकरण के महत्व से उन्हें अवगत कराया जा रहा है। ग्रामीण महिलाओं को लोकतंत्र में मतदान के महत्व की जानकारी से अवगत करा उन्हें वोटिंग के लिये प्रेरित भी किया जा रहा है। यह जानकारी भी दी जा रही है कि चुनाव आयोग के निर्देश पर सभी बूथों पर संक्रमण से बचाव के लिये जरूरी इंतजाम किये गये हैं। उन्हें मास्क लगाकर वोटिंग की प्रक्रिया में शामिल होने व बूथों पर दिये जाने वाले ग्लब्स पहन कर मतदान की सलाह दी जा रही है। मतदान के दौरान दो गज की शारीरिक दूरी बनाये रखने के लिये भी प्रेरित किया जा रहा है।

    जागरूकता से ही हारेगा कुपोषण व कोरोना
    आईसीडीएस डीपीओ सीमा रहमान ने कहा कि कुपोषण व कोरोना दोनों को हराने के लिये जागरूकता ही सबसे बड़ा औजार है। पोषण संबंधी सही जानकारी से अपने आसपास आसानी से उपलब्ध होने वाले खाद्य पदार्थों को अपने नियमित खानपान में शुमार कर कुपोषण को मात दे सकते हैं। जागरूक व सचेत रहकर हम खुद को व अपने परिवार वालों को कोरोना जैसी वैश्विक महामारी की चपेट में आने से बचा सकते हैं। कहा कि कोरोना संक्रमण का खतरा अभी टला नहीं है। इसलिये फिलहाल लोगों विशेष रूप से सचेत रहने की जरूरत है। लोकतंत्र के महापर्व को सफल बनाने के लिये आम मतदाताओं का चुनाव प्रक्रिया में भाग लेना जरूरी है तो स्वस्थ व समृद्ध समाज के निर्माण के लिये कुपोषण को जड़ से मिटाना अनिवार्य है।

    लिहाजा जिला प्रशासन द्वारा संचालित स्वीप अभियान के तहत संचालित मतदाता जागरूकता अभियान में आईसीडीएस कर्मियों द्वारा मतदान, संक्रमण से खुद का बचाव व बेहतर पोषण के उपायों के प्रति जागरूक करने के लिये लगातार विभिन्न तरह की गतिविधियों का आयोजन पूरे जिले में किया जा रहा है।

  • अररिया :संक्रमण की परवाह किये बगैर मरीजों की सेवा में जुटी रहीं प्रेरणा

    बाहरी राज्यों से लौटने वाले प्रवासियों के जांच में निभायी महत्वपूर्ण भागीदारी


    बीएचएम प्रेरणा ने कहा बीमार लोगों की सेवा करने के दौरान उनसे आत्मीय रिश्ता हुआ कायम

    अररिया /संवादाता


    कोरोना संकट के दौर में कई स्वास्थ्य कर्मियों ने संक्रमण के खतरों की परवाह किये बगैर बीमार मरीजों की सेवा की। उन तक जरूरी स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने के कार्य में दिन रात लगे रहे। संकट के दौर में इन कर्मियों की सेवा व समर्पण भाव की खूब सराहना हो रही है। अपने कार्य व जिम्मेदारी के सफल निवर्हन को लेकर अररिया पीएचसी की बीएचएम प्रेरणा रानी भी इन दिनों लोगों के बीच प्रशंसा का पात्र बनी हुई हैं। जिले में जब कोरोना संक्रमण अपने चरम पर था तो प्रेरणा मानव सेवा की मिसाल बन कर सामने आयीं। पीएचसी के अन्य सहयोगियों के साथ वे दिन रात लोगों की मदद के लिये तन्मयता के साथ लगी रहीं। अपने विभागीय कार्यों का निवर्हन करते हुए उन्होंने कोरोना से बचाव को लेकर आवश्यक जानकारी लोगों के तक पहुंचाने व उन्हें स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी गाइड लाइन के अनुपालन को लेकर जागरूक करती रहीं ।

    प्रवासियों की जांच में निभायी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
    संक्रमण काल में प्रवासी मजदूरों को लाने के लिये स्पेशल ट्रेन का परिचालन शुरू होने के बाद स्वास्थ्य कर्मियों की चुनौतियां अचानक से कई गुणा बढ़ गयी थी। इस दौर में काम के बोझ तले दबे पीएचसी के एएनएम सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के मनोबल को बनाये रखते हुए जरूरी कार्यों का समय से निष्पादन गंभीर चुनौती थी। इस मुश्किल दौर में प्रेरणा बाहरी राज्यों से लौट रहे प्रवासियों की जांच में अगुआ बन कर सामने आयी। उन्होंने जांच टीम के नेतृत्व का जिम्मा संभाला। कार्य के प्रति उनका जोश व जुनून टीम में शामिल अन्य एएनएम व स्वास्थ्य कर्मियों के लिये प्रेरक साबित हुआ। लगतार कई दिनों तक स्टेशन पर कैंप का आयोजन होता रहा। इस दौरान स्वास्थ्य कर्मियों को पूरी रात स्टेशन पर ही गुजारना पड़ा। कुशल प्रबंधन व स्वास्थ्य कर्मियों के मजबूत हौसले के दम पर बीएचएम प्रेरणा रानी की अगुआई में बाहरी राज्यों से जिला लौटे लगभग 65 हजार से अधिक प्रवासियों की सफलतापूर्वक कोरोना जांच सुनिश्चित कराई जा सकी ।

    खुद को संक्रमण से बचाने के लिये रहीं सतर्क व सचेत
    बीएचएम प्रेरणा रानी ने कहा कि उस दौर में खुद के संकमित होने का खतरा हमेशा बना रहता था। इसलिये अपने काम को अंजाम देने के दौरान बेहद सतर्क व सचेत रहने की जरूरत थी। उन्होंने लगातार मास्क के सेवन, लोगों से दो गज की उचित दूरी का ख्याल व थोड़े-थोड़े समयांतराल के बाद हाथों की सफाई का पूरा ख्याल रखा। इसके अलावा ताजा पौष्टिक आहार का सेवन व रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ को अपने दैनिक खान-पान में शामिल करते हुए हल्के फुल्के व्यायाम को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया। इससे संक्रमण से बचाव में काफी मदद मिली।

    बीमार लोगों की मदद करते हुए आत्मीय रिश्ता बना –


    संक्रमण काल की उस अवधि में पूरा दिन क्वारेंटाइन सेंटर, आइसोलेशन सेंटर व कंटेनमेंट जोन में ही बिताना होता था। इस क्रम में कई लोगों से लगातार संपर्क होता रहा। लोगों से मिल कर उन्हें संक्रमण से बचाव के उपाय व इससे निजात पाने के लिये स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुपालन को लेकर लगातार प्रेरित व जागरूक करते रहीं। मरीज मोबाइल पर लगातार संपर्क करते और अपनी तकलीफें हमसे साझा करते थे। फिर हर संभव मदद उन तक पहुंचाने का एक जुनून भी दिमाग में उठता और सुबह होते ही इसे अंजाम देने के कार्य में जुट जाती। लगातार मरीजों से बातचीत करते हुए न जाने कब उनसे एक तरह का आत्मीय रिश्ता कायम हो गया। अब जब लोग ठीक हो गये हैं तो हर दिन दर्जनों लोग महज हाल-चाल जानने के लिये फोन करते हैं। लोग मुझे व मेरे परिवार वालों की बरकत व सलामती की दुआ करते हैं। बस इसी से मन गदगद हो उठता है।

    सतर्ककता के साथ कोई भी समझौता अब भी खतरनाक


    बीएचएम प्रेरणा रानी कहती है कि कोरोना का संकट फिलहाल टला नहीं है। ऐसे में अपने स्तर से सतर्कता में किसी प्रकार की चूक नहीं होनी चाहिए। लोगों को अब भी बेवजह अपने घरों से बाहर निकलने में परहेज करना चाहिये। बाहर निकलना अगर जरूरी हो तो मास्क का सेवन व भीड़-भाड़ वाली जगहों से दो गज की दूरी का ध्यान रखना बेहद महत्वपूर्ण है। लोगों को इस बात के लिये जागरूक होना होगा कि उनके स्तर से की गयी कोई भी चूक उनके साथ उनके परिवारों वाले व संपर्क में आने वाले अन्य दर्जनों लोगों के लिये बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकती है।

  • अररिया :वैश्विक महामारी के दौर में घरेलू मसालों ने सुधारी लोगों की सेहत

    अररिया /संवादाता

    संक्रमण काल में घरेलू मसालों का औषधिय प्रयोग में आयी तेजी


    मसाले हमारे घर की रसोई का हमेशा से अभिन्न अंग रहा है. भोजन को स्वादिष्ट बनाने व इसमें नया फ्लेवर डालने में इसकी महत्ता से शायद ही कोई भारतीय परिवार अनिभज्ञ रहा हो. बावजूद इसके हम इन मसालों को ज्यादा महत्व नहीं देते. हम इसे खाना बनाने की प्रक्रिया का महज एक छोटा हिस्सा ही मानते आये हैं. लेकिन खाना को स्वादिष्ट बनाने में प्रयुक्त होने वाले ये मसाले औषधिय गुणों से भरपूर होते हैं.

    इसका सही इस्तेमाल हमें अनेक गंभीर बीमारियों की चपेट में आने से बचा सकता है. इसका पता हमें कोरोना संकट के दौर में ही चल पाया. जाहिर है संक्रमण काल के दौरान आयुष मंत्रालय द्वारा समय-समय पर जारी गाइड लाइन इस लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ. आयुर्वेद के जानकारों की मानें तो स्वाद के लिये प्रयुक्त होने वाले मसाले स्वास्थ्य लाभ से भरपूर होते हैं. संयमित तरीके से इसका नियमित सेवन हर तरह के दुष्प्रभाव से मुक्त होता है. भोजन के रूप में नियमित इसका सेवन शरीर के प्रतिरक्षा प्रणाली बढ़ाने गठिया, कैंसर, मधुमेह सहित कोराना जैसे भयानक संक्रामक बीमारियों से लड़ने में हमारी सहायता करता है.


    संक्रमण काल में औषधिय रूप से बढ़ा मसालों का प्रयोग


    वैश्विक महामारी के दौर में हमारे खान-पान व आदतों में अचानक से बड़ा बदलाव आया. खान-पान में तो मसालों का प्रयोग हम शुरू से ही कर रहे थे. लेकिन संक्रमण काल में औषधिय रूप से मसालों के प्रयोग में तेजी आयी. आयुर्वेदाचार्य डॉ विनोद कुमार झा के मुताबिक हल्दी, धनिया, जीरा, मेथी, अजवाइन, हींग औषधिय गुणों से भरपूर होते हैं. इसलिये संक्रमण काल में ये लोगों के दैनिक खानपान में शुमार हो चुका है. लोग अलग अलग तरीके से इसका उपयोग कर रहे हैं. ताकि प्रतिरक्षा प्रणाली बढ़ा कर महामारी से अपना व अपने परिवार का बचाव किया जा सके.
    रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में साख तौर पर उपयोगी हैं मसाले
    आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ सावन कुमार ने बताया कि शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमताओं के विकास में घरेलू मसाले जैसे हल्दी, जीरा, अजवाइन, हींग, लोंग, दलचीनी का नियमित उपयोग बेहद लाभकारी होता है. जैसे हल्दी एंटीसेप्टिक, एंटी बायोटिक, व एंटी एलर्जिक गुणों से भरपूर होता है. शरीर में किसी प्रकार का दर्द चोट, घाव, खून की कमी व हड्डियों की कमजोरी से जुड़े रोगों में इसका इस्तेमाल उपयोगी है. तो गर्म पानी में हल्दी व नमक डाल कर गरारे करने से गले की खरास ठीक होती है. इसी तरह जीरा हमारे पाचन तंत्र को मजबूत करता है. काली मिर्च खांसी से बचाव, मलेरिया सहित अन्य वायरल बुखार में लोगों को राहत देता है. सर्दी चुकाम से राहत देने में अजवाइन का उपयोग महत्वपूर्ण होता है. पेट दर्द होने की स्थिति में इसका उपयोग किया जाता है. मधुमेह व जोड़ो के दर्ज आदि से राहत पाने के लिये मेथी के प्रयोग की सलाह दी जाती है.

    मसालों में दालचीनी व बड़ी इलायची की बढ़ी मांग :
    किराना व्यवसायी अजय कुमार बताते हैं कि दालचीनी व बड़ी इलायची की मांग इन दिनों काफी बढ़ी है. कोरोना काल में सुबह के चाय से लेकर संक्रमण से बचाव के लिये काढ़ा व शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास के लिये रात में हल्दी मिली हुई दूध का सेवन हर घर में हो रहा है. महामारी से बचने के लिये काढ़ा का उपयोग भी खूब हो रहा है. वह कहते हैं, आयुर्वेद के जानकारों की मानें तो अपने खान-पान संबंधी आदतों के कारण ही हम इस वैश्विक महामारी को मात देने में अबतक बेहद कामयाब रहे हैं.

    इन बातों का भी ध्यान रख कोविड19 संक्रमण की चपेट में आने से बचें

    • सार्वजानिक स्थानों पर लोगों से 2 गज की दूरी बनाएं
    • घर के बाहर हमेशा मास्क का इस्तेमाल करें
    • बाहर काम के दौरान कम से कम दो मास्क रखें। घर में बनाए गए मास्क को समय-समय पर धुलते रहें
    • अपनी आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें
    • हाथों को नियमित रूप से साबुन एवं पानी से अच्छी तरफ साफ करें
    • आल्कोहल आधारित हैण्ड सैनिटाईजर का इस्तेमाल करें
    • तंबाकू, खैनी आदि का प्रयोग नहीं करें, ना ही सार्वजानिक स्थानों पर थूकें