बिहार के सीमावर्ती किशनगंज जिले से जुड़ी है पांडवो के अज्ञातवास की कहानी
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इसी क्षेत्र में पांडवो ने गुजरा था अज्ञातवास का 1वर्ष
राजेश दुबे
भारत नेपाल और बांग्लादेश की सीमा से सटा ७०% मुस्लिम आबादी वाला किशनगंज जिला अपने मे एक संवृद्ध इतिहास को समेटे हुए है ।जिसकी जानकारी कुछ लोगो तक ही सीमित है ?
5000 साल से भी अधिक पुराने कृष्णगंज आज का किशनगंज मे ना सिर्फ पांडवो ने अपने अञातवाश का एक वर्ष गुजारा ब्लकि अञातवाश के दौरान इस पुरे क्षेत्र के अलग अलग स्थानो पर मानवता और धर्म से जुड़े प्रयोग करके वैदिक संस्कृति की विशालता से आने वाली पीढिया अवगत हो उसके अवशेष भी छोड़कर गए ।

महाभारत धारावाहिक में आप ने देखा होगा किचक वध प्रसंग तो हम दिखाते है कहा हुआ था यह भीषण मल्ल युद्ध भीम और कीचक के बीच ।मालूम हो कि भीम एक महान योद्धा थे लेकिन परिस्थितिवश उन्हें राजा विराट के यहां अपने भाईयो के साथ नौकरी करनी पड़ी थी । लेकिन क़ीचक नहीं जानता था उनकी सच्चाई जिसकी वजह से उसने द्रोपदी के साथ दुर्व्यवहार किया ।
बिहार और नेपाल सीमा में बिखरे है महाभारत कालीन अवशेष ।

कनकपुर गॉव वर्तमान ठाकुरगंज प्रखंड से लेकर नेपाल के झापा जिला स्थित पृथ्वीनगर गॉव के अलग अलग स्थानो पर महाभारत कालीन इतिहास से जुड़े रहस्य आज भी मौजुद है ।
नेपाल सरकार जहा इन रहस्यो को पुरी दुनिया के सामने लाने के प्रति संवेदनशील है वही भारत सरकार और यहा की राज्य सरकार इस तरफ ध्यान देना उचित नही समझती जिसका ज्वलंत उदाहरण है ठाकुरगंज स्थित भीम तकिया जहा अञातवाश के दौरान भ्रमण करते हुए पँहुचे कुंती पुत्र भीम ने विश्राम किया सहित अन्य दर्जनो ऐतेहासिक धरोहर जिसके संरक्षण के प्रति सरकार को सवेदनशील होना चाहिए लेकिन तत्कालीन और वर्तमान सरकारो के सवेदनहीनता की वजह से विलुप्त होने के कगार पर पहुँच चुकी है ।
नेपाल स्थित पृथ्वीनगर जहा भीम ने कीचक का वध किया (कीचक नेपाल नरेश राजा विराट के साले थे और अञात वाश के दौरान जब पांडव द्रोपदी के साथ राजा विराट के यहा नौकरी कर रहे थे तो उस दौरान कीचक ने द्रोपदी के साथ दुर्व्यवहार किया ।जिसके बाद भीम और कीचक के बीच मल्ल युद्ध हुआ जिसमे कीचक हार गया और उसकी मृत्यु हुई )वह स्थल आज भी पुरे घटनाक्रम की गवाही देता नजर आऐगा यही नही नेपाल सरकार इस स्थल को पर्यटन केन्द्र के रूप मे विकसित भी कर रहा है ।
बिहार सीमा से मात्र छ: – सात किलोमीटर की दुरी पर स्थित नेपाल मे कीचक वध से जुड़े और राजा विराट के समृद्धशाली इतिहास को देखने के बाद हिन्दुस्तान के प्राचीन इतिहास और सांस्कृतिक विरासत की गौरवगाथा को आसानी से समझा जा सकता है ।

बिहार सरकार यदि नेपाल से इस विषय पर गंभीरता पुर्वक बात करे और दोनो देश इस इलाके को पर्यटन कॉरीडोर के रूप मे विकसित करे तो सदियो से चला आ रहा रोटी -बेटी का रिस्ता तो मजबुत होगा ही साथ – साथ बड़े पैमाने पर बेरोजगारी भी दुर होगी ।