हम जिसे किसी काबिल नहीं समझते वो भी नई इबारत लिख देते है
मधुबाला मौर्या बात सन 2009/10 की होगी उतना याद नहीं, मेरी ज़िन्दगी इतने संघर्षो से भरी रही की कुछ यादें धूमिल होती गयी, पर लोग वो सब नहीं देखते वो तो बस रिजल्ट देखते है, जैसे आज भी पिताजी के पास जाने पर दस लोगों के बीच पूछेंगे मधु बोलो lieutenant की स्पेलिंग क्या होगी, … Read more