मेरी सिमरन मेरी बेटी !
मधुबाला मौर्या तेरे बचपन की खिलखिलाती हँसीं देखती हूंनिःशब्द उसमें विचरण करती हूं,तेरी बचकानी हरकतों मेंअपना बचपन देखती हूं । तेरी जिद्द, अहंकार देखती हूं न भुल पाने वाला व्यक्तित्व देखती हूं,हर दूसरे को डांटने का खोजना बहानाखाना छोड़ के रूठ जाना कुण्डी लगा के हर बात मनवा लेना,तेरे बचकानी हरकतों में अपना बचपन देखती … Read more