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  • पलटी मार (चाचा- भतीजा)

    कुमार राहुल

    ‘ चिराग दिल का जलाओ बहुत अंधेरा है ‘राजनीति में उच्च पदों पर बैठे नेता चराग दूसरों के लिए नहीं जलाते, वरना उनका घर खुद अंधकार में डूब जाएगा ।भाई रामविलास पासवान के मरने के साथ ही, पशुपतिनाथ पारस ने समझ लिया था, कि अब चिराग पासवान का राजनैतिक रसूख का चिराग बुझाने का वक्त आ गया है। इसलिए सभी सांसदों सहित पार्टी के मुखिया बन बैठे। जबकि लोक जनशक्ति पार्टी के पूर्व अध्यक्ष चिराग पासवान का कहना है, कि उन्हें और उनकी मां को लोक जनशक्ति पार्टी में रामविलास पासवान की विरासत संभालने का अवसर मिलना चाहिए।

    हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी काफी सभाओ में कहते हैं, ‘तेरा नंबर कब आएगा’ ‘पारिवारिक पार्टी’ में दूसरे कार्यकर्ताओं का नंबर कभी नहीं आता, इसलिए पार्टी में जनाधार वाले नेता को पार्टी तोड़कर अलग रहा बनानी पड़ती है। वैसे पशुपतिनाथ पारस ( पारस को जनाधार वाला नेता के रूप में गिना नहीं जाता है )पहले नेता नहीं है, जिस ने पलटी मारी। लोक जनशक्ति पार्टी पहले से ही पलटी मार पार्टी रही है। स्वर्गीय रामविलास पासवान को श्री लालू प्रसाद यादव’ मौसम वैज्ञानिक’ कहते रहे हैं। रामविलास पासवान अपने पूरे करियर में अक्सर सत्ता पाने के लिए बेहतर अवसर वाली पार्टी के साथ गठबंधन या समझौता करते रहें, और सत्ता का सुख भोगते रहे ।

    चाचा पारस ने भतीजा चिराग को धोखा इसलिए दिया, क्योंकि जदयू के प्रति उन्हें अपनी प्रगाढ़ता साबित करनी है। और जल्द ही मोदी कैबिनेट की विस्तार की संभावना है ।जिसमे रामविलास पासवान के मरने के बाद कैबिनेट में एलजीपी को एक मंत्री पद मिलने की संभावना है। इसलिए चाचा ने पार्टी के सभी सांसदों का समर्थन एवं अध्यक्ष पद हथिया कर खुद को दावेदार साबित कर दिया, और भतीजे को ठेंगा दिखा दिया।






    ‘साजिशें अभी से हैं, बागवानों( माली), गुलची ( भंवरा) में ,
    अभी तो गुले बहार का पता ही नहीं ‘.

    महाराष्ट्र के अजीत पवार वर्तमान उपमुख्यमंत्री कई बार अपनी ओछी हरकत और भाषणों के कारण सुर्खियों में रहे हैं। 2 वर्ष पहले अपने चाचा शरद पवार की पार्टी (NCP )को हाईजैक कर, देवेंद्र फडणवीस के साथ 2 दिनों वाली सरकार बना ली ।दो दिनों बाद फिर एनसीपी में लौट गए। यह राजनीतिक पलटी मारी का अभूतपूर्व नमूना था ।वर्तमान उपमुख्यमंत्री ने अपने भाषण में एक बार यहां तक कह दिया, कि अगर महाराष्ट्र में पानी की कमी है, तो मूत कर पानी की कमी पूरा करो।इसे कहते हैं,
    ‘अल्लाह मेहरबान तो, गधा पहलवान’ ।

    उसी महाराष्ट्र में राज ठाकरे यानी शिवसेना के फायर ब्रांड नेता को अपनी पार्टी छोड़कर नयी पार्टी ‘महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ‘बनानी पड़ी। लेकिन फायदे का सौदा साबित नहीं हुआ। हफ्ता वसूल पार्टी के नाम से मशहूर शिवसेना से अलग हुए राज ठाकरे कई बार हफ्ता वसूली के मामले में ईडी के दफ्तर के चक्कर काटते नजर आते हैं। जबकि चचेरे भाई उद्धव ठाकरे जिसने हिंदू पार्टी के नाम पर वोट पाया ,अपने धूर विरोधियों के साथ मिलकर मुख्यमंत्री की गद्दी संभाल रहे हैं ।भारतीय राजनीति मे अधिकांश पारिवारिक पार्टियों में ,चाचा ही भतीजे पर भारी पड़ते हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश थोड़ा अलग है ।जहां अखिलेश यादव ने अपने चाचा शिवपाल यादव की सारी महत्वाकांक्षा को पानी फेर कर पार्टी हथिया ली। दरअसल इसके पीछे भी मुलायम सिंह यादव का पुत्र मोह ही था। जिस ने बड़ी चालाकी से पहले बेटे को यूपी का मुख्यमंत्री बना दिया, जब पार्टी टूटी तो दिखावे के लिए भाई शिवपाल के साथ दिखे।






    अब शिवपाल यादव की पार्टी का अस्तित्व यूपी में कहीं नजर ही नहीं आता । यह तो वही बात हुई ना..
    जरूरत पड़ी तो खून हमने दिया ,
    बहारें आई तो कहते हैं तुम कौन हो’
    गनीमत यह है ,कि लालू प्रसाद यादव ने अपने भाइयों को एक्टिव पॉलिटिक्स में शामिल नहीं किया। बल्कि तरजीह अपने सालाओं को दी, जब सालों ने पलटी मारी तो, उसे हाशिए में ढकेल दिया गया। ठीक उसी तरह जैसे गांधी फैमिली में वरुण गांधी और उसकी मां को पार्टी से बाहर रखा। वैसे वरुण गांधी एक्टिव तो है, लेकिन असरदार नहीं दिखते हैं। लेकिन साउथ इंडिया की पारिवारिक पार्टी में उठापटक तुलनात्मक दृष्टि से कम ही दिखाई पड़ती है, करुणानिधि की पार्टी (DMK )में स्टालिन ने अपने भाई अलागिरी को येन केन प्रकारेण साइडलाइन कर दिया। जबकि मूरोसली मारन( करुणानिधि के रिलेटिव ) ने कभी भी सत्ता और सर्वोच्च पद पाने के लिए उठापटक नहीं की। अब सवाल यह है ,कि आज भी हम क्या राजतंत्र में जी रहे हैं? एक व्यक्ति संघर्ष कर अपना राजनीतिक अस्तित्व बनाता है, तो क्या उन्हें यह अधिकार प्राप्त हो जाता है ,कि नए लोगों को रोक कर, अपने परिवार के लोगों को सत्ता में काबिज कराएं ।तो फिर नए संघर्ष करने वाले लोगों का नंबर कब आएगा ? इसके लिए दोषी हम सभी लोग हैं ,जो पारिवारिक राजनीतिक party को अपना मत देकर, सफलता की सीढ़ी चढ़ने में मदद करते हैं ।






    बेशक वह व्यक्ति उस पद के काबिल ही ना हो। गलत व्यक्ति को चुनने के बाद, फिर हम उम्मीद करें, कि पद पाने के बाद वह अच्छा हो जाएगा।ऐसा हो ही नहीं सकता है ।हम सभी को धर्म, जाति ,परिवारवाद की राजनीति से ऊपर उठना पड़ेगा ,वरना अयोग्य व्यक्तियों की पारिवारिक राजनीतिक लड़ाई और सत्ता पाने की होड से समाज और देश का ही नुकसान होगा।






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  • करिश्मा से कोरोना तक,मिशन-2022

    कुमार राहुल

    यह किसी करिश्मे से कम नहीं था, कि एक 47 सीटों  वाली पार्टी अचानक 320 सीट से अधिक जीतकर उत्तर प्रदेश की सत्ता में काबिज होती है ।1997 से 2002 तक चली भाजपा की सरकार में 3 मुख्यमंत्री रहे हैं ,और 15 साल के इंतजार के बाद 2017 में योगी आदित्यनाथ भाजपा के मुख्यमंत्री बने ।लेकिन 2022 का चुनाव भाजपा के लिए नई चुनौती पेश कर रहा है ,चुनौती है… कोरोना काल ..अब तक दो लहर का सामना कर चुके योगी सरकार को चुनाव से पहले एक और कोरोना  की लहर का सामना करना है ।लॉकडाउन से उत्पन्न बेरोजगारी मुंह बाए खड़ी है। आर्थिक सूचकांक अपने न्यूनतम स्तर पर है ।ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं की कमी से हजारों घर तबाह हो गए हैं,हजारों लोगों ने अपनों को खोया है।गंगा में बहती लाशों को देखा है। ऑक्सीजन की कमी से अपनों को तिल तेल मरते देखा है, अपनों को खोने का दर्द 7 -8 महीने में भूल जाना आसान नहीं है ,क्योंकि लोगों ने देखा है कि किस तरह से covid को कंट्रोल करने में सरकार असफल रही.






    कोरोना के कारण बहुत तरह का नुक़सान हुआ है ,जिसे कंट्रोल करने के लिए योगी ने खुद मोर्चा संभाला है ,क्योंकि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने टिप्पणी की ,कि यूपी में स्वास्थ्य व्यवस्था राम भरोसे है। इन दिनों 75 में से 40 जिले एवं ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने की निगरानी खुद सीएम योगी कर रहे हैं। चुनाव लगभग 8 महीने बाद है.. बीजेपी  अक्सर एक साल पहले ही चुनावी मोड में आ जाती है ..जैसा कि अन्य चुनाव की तरह बंगाल चुनाव मे  1 साल पहले की चुनावी तैयारी ,आपने टीवी न्यूज़ में देखा ही होगा ..मई 2021 के अंतिम सप्ताह में बीजेपी महासचिव   B.L.santosh का तीन दिवसीय दौरे से… मीडिया जगत को लगा  कि.. शायद यूपी चुनाव की तैयारी शुरू हो रही है, जबकि कोविड  की दूसरी लहर चरम पर थी ..और लगा कि शायद कुछ फेरबदल के संकेत भी है.. लेकिन जानकारों की माने तो 36% विधायकों ने साफ कह दिया, कि योगी को हटाया तो 2022 में पराजय निश्चित है। विडंबना यह है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को 64%..36% पर भारी लगने लगा है। भाजपा उस मुख्यमंत्री के नेतृत्व में चुनाव लड़ने जा रही है, इसके खिलाफ 64 प्रतिशत विधायक हैं ..ऐसे मैं अगर  ब्राह्मण ,कुर्मी, लोधी, राजभर, निषाद और जाट नाराज रहे तो रहे ।तरीका यह है, कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों का बकाया दे देने से उसका गुस्सा पहले जैसा नहीं रह जाएगा। जतिन प्रसाद को कांग्रेस से भाजपा में लाकर विकास दुबे एनकाउंटर से पैदा हुए ,ब्राह्मण समाज के क्षोभ को कम करने की कोशिश की जा रही है.. क्योंकि यूपी में लगभग 11 से 12 प्रतिशत ब्राह्मण मतदाता है ..कोशिश ये भी की जा सकती है, कि किसी ब्राह्मण को उप मुख्यमंत्री बना दिया जाए.. फिर ..तिलक तराजू और तलवार ..के फार्मूले से बेड़ा पार किया जाए ।लेकिन यह भी हमें नहीं भूलना चाहिए ,कि कोरोना महामारी के बीच संपन्न हुए, पंचायत चुनाव में एक ओर सैकड़ों चुनाव कर्मी कोरोना के शिकार होकर स्वर्ग सिधार गए है। और भाजपा  को उनके गढ़ में समाजवादी पार्टी ने बड़ा जोर का झटका धीरे से दिया है.






    बीजेपी को पंचायत चुनाव में काफी नुकसान उठाना पड़ा। तो क्या आने वाले असेंबली चुनाव में समाजवादी पार्टी चुनौती पेश करने जा रही है.. हमें यह नहीं भूलना चाहिए, कि भारतीय वोटर समझने लगे हैं ,कि  किस चुनाव में  कैसे वोटिंग करनी चाहिए। खास बात तो यह है ,कि योगी सरकार की कमजोरियों, खामियों के विरोध में ना ही समाजवादी पार्टी ,ना ही बहुजन समाज पार्टी ने , ना ही कांग्रेस पार्टी सड़कों में संघर्ष करती नजर आई ।प्रियंका गांधी ने 1 से 2 मौके में संघर्ष जरूर किया ,लेकिन वह संघर्ष काफी नहीं हैे उसी संघर्ष की बुनियाद पर काग्रेस पार्टी के नेताओं के अनुसार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी सबसे बड़ी चुनौती बन कर उभरने वाली है ,क्योंकि उनके संघर्ष का सबूत है, कि 9000 मुकदमे जो पार्टी कार्यकर्ताओं पर कर दिए गए हैं। अब सवाल यह है, कि प्रियंका गांधी ,जिनकी पार्टी को 2017 असेंबली इलेक्शन में मात्र 6.3% वोट ही मिले, वह भाजपा जिन्हें 41 पर्सेंट वोट मिले ,को कैसे चुनौती देगी ,यह भी बहुत बड़ा सवाल है ,अगर ऐसा होता है तो, यह भी बहुत बड़ा करिश्मा होगा। बसपा 22.4 परसेंट वोट शेयर, सपा 22 %  वोट शेयर लेकर, अलग-अलग चुनाव लड़ने की स्थिति में ,भाजपा को अधिक दिक्कत आती नहीं दिख रही है। लेकिन हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए ,कि 1997 से अब तक कोई भी पार्टी लगातार 2 बार चुनाव नहीं जीत सकी है। यानी इस बार के असेंबली चुनाव में चुनौती सिंबॉलिक रूप से पार्टियां जरूर होगी,लेकिन असल चुनौती कोविड से परेशान, हताश जनता ही भाजपा को पेश करेगी ।






    कयास यह भी लगाए जा रहे हैं ,कि केशव प्रसाद मौर्य को फिर से अध्यक्ष बनाकर, योगी के लीडरशिप में चुनाव लड़ा जाए ।क्योंकि पीएम मोदी की सरकार से  महामारी के कुप्रबंधन के कारण मिले दर्द को लोग शायद  भूलने को तैयार नहीं होंगे। और कोविड के कारण श्री नरेंद्र मोदी की छवि में जो गिरावट हुई है ,उसे ठीक करने की कोशिश की जा रही है ।इसलिए डीएपी खाद में 140% की सब्सिडी, पीएम किसान योजना की आखिरी किस्त के तहत 20667 . 75 करोड रुपए 95 करोड़ किसानों के खाते में डाले गए ।शहरी मध्यम वर्ग की अप्रसन्नता को पहचान कर तुरंत विभिन्न महंगाई भत्ते बढ़ाए गए, जिससे केंद्रीय क्षेत्र  में काम कर रहे 1.5 करोड़ कॉन्ट्रैक्ट और अनौपचारिक कामगारों को लाभ होगा ।इन सब के बावजूद प्रधानमंत्री को अब भी काफी सद्भावना हासिल है। लेकिन अगला साल निर्णायक साबित होगा ।क्योंकि जिन राज्यों में अब चुनाव होने हैं, उनमें भी कोविड की छाया रहेगी ।इन का सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश में रहेगा। लेकिन  RSS बिना शोर-शराबे के एक डेढ़ साल पहले से ही अपने ढेर सारे स्वयंसेवकों के साथ चुनावी राज्य में चुपचाप काम में लग जाती है । RSS के सरकार्यवाह (जनरल सेक्रेटरी) दत्तात्रेय होसबोले चुनावी मैनेजमेंट के माहिर माने जाते हैं, 2017 मे उत्तर प्रदेश चुनाव के 1 साल पहले से लखनऊ में रहकर बीजेपी को ग्राउंड लेवल में मजबूत करने की रणनीति बनाने में कामयाब हुए थे । इस बार भी 1 साल पहले से लखनऊ में डटे हुए हैं लेकिन इस बार जो चुनौती है वह कोरोना है ,और सभी जाति धर्म के लोग  इससे पीड़ित हुए हैं। और असेंबली चुनाव तीसरी लहर के बाद ही होना है..






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    उपरोक्त विचार लेखक के निजी विचार है ।

  • जिम्मेदार कौन ?
    (कोरोना /मोदी) -कुमार राहुल की कलम से


    हमीरपुर (कानपुर ,उत्तर प्रदेश) यमुना नदी में 12 लाशें तैरती मिली ,पुलिस रिपोर्ट में सभी लाशें कोरोना पीड़ितों की थी ,मध्य प्रदेश की सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के 13 गांव का एक अखबार ने जायजा लिया। ललितपुर जिले में अचानक लोग सर्दी ,खांसी, जुकाम से मर रहे हैं ।इनमें से किसी लोगों का आरटीपीसीआर,या रैपिड एंटीजन टेस्ट नहीं हुआ ,क्योंकि सारे गांव जिला मुख्यालय से 60 किलोमीटर दूर है।

    बिहार के किशनगंज जिले में 8 मई को मेरे परिजन कोरोना से युद्ध हार गए ,उस श्मशान में 6 कोरोना मरीजो का अंतिम संस्कार हो चुका था, लेकिन सरकारी आंकड़े मात्र दो व्यक्तियो कि मौत दिखा रहा है। जबकि हमीरपुर और ललितपुर के मृतकों को सरकारी आंकड़ों में कहीं जगह नहीं मिल सकी। यह तो महज कुछ एक उदाहरण है, जबकि भारत के अधिकतर गांवों और जिलों का यही हाल है ।जहां असल मृतकों का आकडा सरकारी आंकड़ों को बहुत पीछे छोड़ देंगे ।


    शहर के शहर वीरान हो जाएंगे, वीराने में हुकूमत तुझे भी रास ना आएगी ,साहेब
    ऐसा नहीं है कि सिर्फ आम नागरिक मेडिकल की सुविधा के अभाव में दम तोड़ रहे हैं ,अनेक पार्टियों के नेताओं (जिसका कोरोना से देहांत हुआ )के साथ यूपी बीजेपी अपने चार MLA को खो चुकी हैं ।और वे सभी योगी,… मोदी को मिन्नतें करने के बाद भी अच्छी मेडिकल सुविधा प्राप्त नहीं कर सके ।एक और घटना झकझोरने वाली है ,बीजेपी के MLA अपनी पत्नी संध्या लोधी (कोरोना पीड़ित) को लेकर अस्पतालों के चक्कर काटते रहे, लेकिन किसी ने एडमिट नहीं किया ।

    बाद में स्थानीय डीएम ने किसी तरह एक अस्पताल में एक बेड मुहैया कराया।यानी बीजेपी की सरकार केंद्र में हो या राज्य में, कोरोना की दूसरी लहर के सामने घुटने टेक चुकी है। एक बात स्पष्ट हो चुकी है ,कि बीजेपी शासित केंद्र सरकार हर काम बिना तैयारी करती है ,चाहे नोटबंदी ,जीएसटी हो या कोरोना से दूसरी लहर की तैयारी हो ।खास बात तो यह है,UNO कि चेतावनी के बावजूद जनवरी-फरवरी 2021 में कोरोना से जंग जीतने का जश्न मनाया गया।

    हद तो तब हो गई ,जब जुलाई -अगस्त 2020 में दुनिया के सारे विकसित देश vaccine रिसर्च कंपनी में अपनी वैक्सीन बुकिंग, एडवांस पेमेंट देकर कर रहे थे ,भारत ने ऐसा नहीं किया, फिर जनवरी-फरवरी 2021 में वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों से मोलभाव में 15 दिन निकाल दिया। और वाहवाही लूटने के लिए 6 करोड़ से अधिक डोज अन्य देशों में निर्यात भी कर दिया। जबकि उस वक्त वैक्सीनेशन Drive शुरू हो जानी चाहिए थी ।

    चाणक्य ने सही ही कहा है ।
    जिस देश का राजा व्यापारी
    उस देश की जनता भिखारी।


    137 करोड़ आबादी वाले देश की वैक्सीनेशन आज 17 करोड लोगों तक ही पहुंच सकी है आज भी केंद्र सरकार को जनता की फिक्र नहीं है ।सरकार नए संसद भवन के निर्माण कार्य तेजी से करवा रही है ,जो कि 1927 में ही बना है ।जबकि हालैंड की संसद भवन 13 वी सदी में बनी है ।इटली की 16वी सदी मे, फ्रांस की 1645 में ,Britain की 1870 में।

    इसलिए राहुल गांधी का कहना है कि ,
    जनता को सांस चाहिए ,
    लेकिन Saheb को निवास चाहिए ।


    ना नौकरी ,ना इंडस्ट्री ,सिर्फ झूठा दिखावा ,सिर्फ राजसी प्रचार- प्रसार ,झूठे वादे और सिर्फ राम नाम …इसी से जनता का.. राम नाम सत्य …हो रहा है ।बंगाल और कोरोना से बिफल लड़ाई के बाद …सेंटर फॉर स्टडी डेवलपिंग स्टडीज.. के डायरेक्टर संजय कुमार के सर्वे के अनुसार प्रधानमंत्री की लोकप्रियता 13% गिर गई है।

    बाकी तो आप समझ ही गए होंगे ।
    आपकी उसूलों के खिलाफ जनता सारी है।
    याद रखिए 2024 आप पर भारी है।

    उपरोक्त विचार लेखक के निजी विचार है ।






  • सरस्वतीचंद्र -डॉ सजल प्रसाद

    कल शाम 4 बजे जब लिखना शुरू करना चाहा तो, मन-मस्तिष्क में कुछ भी नहीं था। कहीं कुछ सोच भी नहीं पा रहा था। लेकिन, रचना का प्लॉट हमारे आसपास ही होता है। मैंने यूँ ही फेसबुक खोला तो मेरी नज़र किसी मित्र के स्टेटस पर पड़ी। मैट्रिक परीक्षा के रिजल्ट के संदर्भ में उन्होंने फेसबुक पर पोस्ट किया था – ‘पढ़ा लिखा साढ़े बाइस, नंबर आया चार सौ बाइस।’
    बस, यहीं पर मेरे व्यंग्य का प्लॉट का सूझ गया .. और, यदि व्यंग्य ख़ुद पर हो तो ! …. तो, आप भी पढ़िए !
    मैं एक शिक्षक हूँ, सभी शिक्षकों से क्षमा याचना सहित –

    सरस्वतीचंद्र

    व्यंग्य / डॉ. सजल प्रसाद

    ••••••••••••••••••••••••••••••••
    अड़ोसी-पड़ोसी सब हैरान …! जितने नाते-रिश्तेदार, वो भी हैरान … ! और तो और, खुद माँ-बाप भी हैरान … ! सबके सब हैरान कि पढ़ाई-लिखाई से कोसों दूर रहनेवाला और दिनभर मटरगश्ती करने वाला अपने नाम के उलट सरस्वतीचंद्र आखिर मैट्रिक परीक्षा में फर्स्ट कैसे आ गया … !
    किसी पड़ोसी ने फब्ती कसी – ” पढ़ाई-लिखाई साढ़े बाइस और नम्बर आया चार सौ बाइस। ” उस पर तुर्रा यह कि पड़ोसी ने चिढ़कर अपने फेसबुक स्टेटस को अपडेट करते हुए इसी फब्ती वाली लाइन को पोस्ट भी कर दिया। मोहल्ले के सभी फेसबुक फ्रेंड समझ गए कि गुलजारी लाल ने किसके बारे में यह लिखा है। कई लोग कहने लगे कि गुलजारी लाल ने खूब तीर चलाया। तो, कई ऐसे भी थे जो कह रहे थे -” गुलजारी लाल जलभुन कर राख हो रहा है, इसलिए ऐसा कह रहा है। “
    एक पड़ोसी ने कोई रहस्य जैसे खोलते हुए अपनी टिप्पणी की – ” जरूर सरस्वतीचंद्र रात में पढ़ता होगा, जब सभी गहरी नींद में सो जाते होंगे। “


    यह सुनकर सरस्वतीचंद्र के पिता भी आश्चर्यजनक भाव से सोचने लगे। फिर, मन ही मन कहा – ” मैं तो यही देखने के लिए बीते एक साल से रात में ठीक 12 बजे और 2 बजे उठ-उठकर देखता रहा। लेकिन, हर बार मुझे सरस्वतीचंद्र रात भर घोड़े बेचकर सोता मिला। “
    ख़ैर, जो भी हो, रिजल्ट आ चुका था तो एक तरफ सरस्वतीचन्द्र की तारीफ़ में कसीदे पढ़े जाने लगे तो दूसरी ओर उसे सुबह-शाम ट्यूशन पढ़ाने वाले टीचर को भी क्रेडिट दी जाने लगी।


    ” यह मास्टर जरूर बहुत अच्छा पढ़ाता होगा, तभी हम सभी की नज़र में ऐसा भुसगोल विद्यार्थी भी मैट्रिक परीक्षा में फर्स्ट आ गया। ” – मोहल्ले के दूसरे पड़ोसी ने विशेषज्ञ टिप्पणी दी। अचानक ही ट्यूशन पढ़ाने वाले टीचर की मार्केट वैल्यू काफी बढ़ गई।
    दूसरे बच्चों के गार्जियन इस टीचर के फोन घनघनाने लगे। सभी अपने बच्चों के लिए स्पेयर टाइम मांगने लगे और मुँहमाँगी मेहनताना देने का ऑफर भी देने लगे।


    यह सब देख-सुनकर टीचर भी पुलकित हो रहा था।लेकिन, यह टीचर खुद हैरान भी था कि अव्वल दर्जे का मूर्ख सरस्वतीचंद्र, जो पास करने लायक भी नहीं था वो मैट्रिक में फर्स्ट कैसे आ गया ! उसने इस रहस्य का पता लगाने की ठान ली।
    दूसरे दिन ही वह बोर्ड कार्यालय पहुंच गया और सरस्वतीचंद्र की सभी उत्तरपुस्तिकाओं की सर्टिफाइड कॉपी प्राप्त करने के लिए निर्धारित शुल्क के साथ अर्जी लगा दी। बोर्ड के अधिकारी ने अर्जी देखी और इस टीचर को जिला मुख्यालय जाने को कहा जहाँ एक मूल्यांकन केन्द्र में सभी जाँची गई उत्तरपुस्तिकाएं रखी गईं थीं।


    दूसरे दिन ट्रेन पकड़कर टीचर अपने जिला मुख्यालय के मूल्यांकन केन्द्र में पहुंचा और बोर्ड के अधिकारी का लिखित ऑर्डर देकर सरस्वतीचंद्र की सभी उत्तरपुस्तिकाओं की सर्टिफाइड कॉपी उपलब्ध कराने को कहा।
    यह लिखित फरमान देखकर अब मूल्यांकन निदेशक सकपकाए। सभी को-कॉर्डिनेटर को तुरंत तालाब किया गया। रजिस्टर से मिलान कर सरस्वतीचंद्र की विषयवार उत्तरपुस्तिकाएं निकाली गईं। उत्तरपुस्तिकाओं में लिखे गए उत्तर को देखकर मूल्यांकन निदेशक की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। प्रश्न कुछ और उत्तर कुछ और। उस पर फर्स्ट क्लास का नंबर।


    आनन-फानन में कॉपी जाँचने वाले परीक्षकों को बुलाया गया। इन सभी परीक्षकों के भी पसीने छूटने लगे। गिरते-पड़ते सभी मूल्यांकन केन्द्र पहुँचे।
    सभी सब्जेक्ट के परीक्षकों के आगे सरस्वतीचंद्र की कॉपी रख दी गई। अब सभी का तो काटो खून नहीं ! तबतक हेड एक्जामिनर भी बुला लिए गए थे। उन्होंने भी अपना सिर पीट लिया। हेड एक्जामिनर सकते में थे। सभी कॉपी में सरस्वतीचंद्र ने अपना नाम लिख-लिखकर पन्ने भर दिए थे।


    ट्यूशन पढ़ाने वाले टीचर भी उत्सुकतावश सभी पेज पलटते गए। सारे पेज पर सभी लाइनों में सजावटी तरीके से लिखा था – ‘ सरस्वतीचंद्र सरस्वतीचंद्र सरस्वतीचंद्र सरस्वतीचंद्र सरस्वतीचंद्र ‘
    न तो कहीं कोमा था और न ही फुलस्टॉप। ट्यूटर को इस बात पर भी हैरानी हुई कि इतना धैर्यपूर्वक उसके भुसगोल विद्यार्थी ने अपना नाम भी इतनी बार कैसे दोहरा-दोहराकर लिखा। लेकिन वे अपने विद्यार्थी के हैंडराइटिंग से वाकिफ़ थे, इसलिए उन्हें मानना पड़ा।
    इसके बाद मूल्यांकन केंद्र के निदेशक ने गणित विषय के एक्जामिनर को पूछा – ” आपने इस कॉपी पर कैसे 60 नंबर चढ़ा दिए ? “


    ” सर ! क्या कहें आपको … रसोई गैस सिलिंडर का दाम जब 1000 रुपये के आसपास हो गया तो, माथा भन्ना गया सर ! इस महँगाई के दौर में जीना दुश्वार हो गया है सर ! उसपर आपलोग पूरा वाजिब होल्टिंग चार्ज भी नहीं देते हैं तो 60 किलोमीटर दूर से नदी पार कर आकर क्या खाक कॉपी देख पाएंगे … इसलिए देखिए नहीं सके कि ई कॉपी में का लिखा है का नहीं .. सो हमहूँ ई लइका को 60 नंबर आँख बंद करके दे दिए। “
    अब बारी हिंदी के परीक्षक की थी। वह भी घिघियाकर बोलने लगे – ” जीवन में आपाधापी मची है .. दवाई-दारू करने में सारी सैलेरी खत्म हो जाती है सर जी ! नर्सिंग होम वाले घर के पेशेंट के इलाज के नाम पर दोनों हाथों से लूट रहे हैं …नीरस ज़िंदगी में रोमांस कहीं बचा ही नहीं है … कॉपी में केवल ‘सरस्वतीचंद्र’ लिखा देखा तो इसी नाम की पुरानी फ़िल्म याद आ गई और नहाती हुई बेहद खूबसूरत अभिनेत्री नूतन पर फिल्माया गया ‘चंदन सा बदन .. चंचल चितवन ..धीरे से तेरा ये मुस्काना .. मुझे दोष न देना जग वालों .. हो जाऊँ अगर मैं दीवाना’ शीर्षक गाना याद आ गया तो, मैंने खुश होकर कॉपी पर 60 नंबर बैठा दिए।
    अबकी डायरेक्टर साहब ने सोशल साइंस के परीक्षक की तरफ सवाल उछाला – ” आप बताइए जनाब ! आपने कैसे नंबर दिए ! “


    पहले से ही अपनी गलती मान बैठे सोशल साइंस के एक्जामिनर ने कुछ अलग अंदाज में कहा – ” डायरेक्टर साहब ! आप इस कॉपी पर दिए गए नंबर पर सवाल उठा रहे हैं न ! लेकिन क्या आपने यह सवाल उठाया कि क्लासरूम में कोरोना घुस जाता है, शादी-ब्याह में भी कोरोना की घुसपैठ हो जाती है , होली-ईद में भी कोरोना का प्रवेश हो जाता है लेकिन, चुनावी रैलियों में कोरोना घुस नहीं सकता है क्यों ? …. आखिर क्यों ? “
    सोशल साइंस के एक्जामिनर की वॉयस मशीन का गियर बदल गया था और उनके बोलने की स्पीड फोर्थ गियर में हो गई थी।


    ” आप ही बताइए डायरेक्टर साहेब ! ये जो पड़ोसी राज्य में चुनाव के नाम पर ‘खेला होबे, खेला होबे, खेला होबे’ तो कहीं ‘विकास होबे, विकास होबे, विकास होबे’ की पुनरुक्ति हो रही है तो,उसे राज्य सरकार और केन्द्र सरकार काहे नहीं रोक रही है ? “
    यह कहकर एक्जामिनर कहने लगे – ” जब शीर्ष महिला और शीर्ष पुरुष एक ही बात को पिछले कई माह से दोहरा सकते हैं तो, इस बच्चे ने अपने नाम को कई बार दोहरा लिया तो क्या गुनाह किया ! … आप ही बताइए क्या गुनाह किया ?


    वस्तुतः सरस्वतीचंद्र ने राज्य सरकार की शीर्ष महिला और केंद्र सरकार के शीर्ष पृरुष से प्रेरित होकर किताबी ज्ञान की बजाय व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया तो उसे 60 नंबर मिलने ही चाहिए थे। “
    डायरेक्टर साहब अब खुद उहापोह में फंस गए थे। किसी तरह उन्होंने संस्कृत के परीक्षक की तरफ देखा और पूछा – ” आप अपना पक्ष बताइए आचार्य जी ! “
    शांत चित्त होकर आचार्य जी ने कहा – ” बालक ने अपने मन-प्राण से ध्यानयोग का अद्भुत परिचय दिया और माता सरस्वती का आराधक-पुत्र बनकर केवल ‘सरस्वतीचंद्र’ रटता-लिखता रहा … यह साधारण बालक नहीं है… अतएव मैंने प्रसन्न होकर आशीर्वाद स्वरूप इस बालक की उत्तरपुस्तिका पर 60 अंक अंकित कर दिए। “


    यह सब देख-सुनने के बाद आखिर में जब सरस्वतीचंद्र के ट्यूटर ने सर्टिफाइड कॉपी माँगी तो, मूल्यांकन निदेशक ने हाथ जोड़ लिए। ट्यूशन पढ़ने वाले इस शिक्षक ने भी अपने साथी शिक्षकों का मान रख लिया और वे खाली हाथ लौट गए।

    सम्प्रति :
    एसोसिएट प्रोफेसर व
    विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग
    मारवाड़ी कॉलेज, किशनगंज (बिहार)।

  • विशेष :देश विदेश में अचानक से आगजनी की घटनाएं क्यों बढ़ गई..

    लेखक /गर्ग जी

    15 जनवरी 2021 को एस्ट्रोलॉजर गर्गजी ने टिवीटर @Radhe Numerology पर एक पोस्ट के माध्यम से भविष्यवाणी की 15 जनवरी  से 20 जनवरी के बीच देश व विदेश में अग्नि से बड़ी हानि होने योग बने हुये है। उन्होंने लोगों को आगाह भी किया था कि इस दौरान सावधानी बरतें और सुरक्षित रहे। गर्ग जी की भविष्यवाणी के अनुसार 15 जनवरी से 20 जनवरी के बीच पूरी दुनिया में में आगजनी की बहुत सी घटनाएं घटित हुई है। उन्होंने लिखा था कि घर वह बिजनेश स्थल पर लाइटिंग लूज ना रखें। गैस पाइप लाइन कही से कटी फटी तो नही है, गैस पाइप का ख्याल रखे वाहन सावधानी से चलाये वह वाहन की वायरिग का भी ख्याल रखें।






    बीते एक सप्ताह में उनकी भविष्यवाणी के अनुसार पूरे विश्व में निम्न घटनाएं घटित हुई है।

    ?बीते सप्ताह विश्व में घटित आगजनी की तीन बड़ी घटनाये जो कि इतिहास के काले पन्नो में दर्ज हो गई…

    पहली घटना 18 जनवरी 2021 को दुनिया के सबसे ऊँचे मोटरसाइकिल म्यूजियम में 230 के करीब एंटीक बाइके भीषण आग के कारण जलकर खाक हो गई।

    दूसरी घटना अमेरिकी संसद वाइट हाउस जहां परिंदा भी ऊपर गुजरने से पहले 2 बार सोचता है में भीषण आग लग गई। महाशक्ति संसद में  कड़ी सुरक्षा के बीच भीषण आग लगना बड़ा ही ताज्जुब का विषय है।

    तीसरी घटना  पुणे के सिरम इंस्टीट्यूट में लगी भीषण आग से सिरम इंस्टीट्यूट के मालिक आदर जी पूणेवाले को 1000 करोड़ से ऊपर का नुकसान हो गया।

    15जनवरी को गर्ग जी द्वारा की गई भविष्यवाणी
    कुछ मुख्य रूप से घटित आगजनी की घटनाएं:

    1. ब्राजील के Riode janeiro रिहायशी इलाके में भीषण आग से कई घर जलकर खाक हो गए।
    2. जोधपुर राजस्थान में हैंडीक्राफ्ट फेक्ट्री में भीषण आग लगने से लाखों रुपया का माल जलकर खाक हो गया।
    3. चाइना में कपड़े की फैक्ट्री में भीषण आग से करोड़ो रूपये का माल जलकर खाक हो गया।
    4. घाट शिला वनविभाग डिपो में भीषण आग लाखो रुपये का नुकसान हो गया।
    5. बालोतरा में कपड़े की फैक्ट्री में भीषण आग से लाखों का माल जलकर खाक हो गया।
    6. मालाबार एक्सप्रेस के लगेज बोगी में भीषण आग से लाखों रुपये माल जलकर खाक हो गया।
    7. आई आई टी बीएचयू लेब में लगी भीषण आग से करोड़ो रुपये के उपकरण जलकर खाक हो गए।
    8. किशनगंज में लगी भीषण आग से कई घर जलकर खाक हो गये।
    9. जयपुर की कीटनाशक दवा गोदाम में भीषण आग से लाखों का माल जलकर खाक हो गया।
    10. बहादुरगढ़ में तीन फैक्ट्रियां में लगी भीषण आग से करोड़ो का माल जलकर खाक हो गया।
    11. पटना के मौर्या लोक कॉम्प्लेक्स में लगी भीषण आग से करोड़ो रूपये का माल जलकर खाक हो गया।
    12. अहदाबाद में अंबेडकर हॉल में लगी भीषण आग से करोड़ो रूपये का नुकसान हो गया।
    13. बोकारो वेदांता प्लांट में भीषण  आग  लगने से करोड़ो रूपये का नुकसान हो गया।
    14. जमशेदपुर टाटा प्लांट में भीषण आग लगने से करोड़ो रूपये का नुकसान हो गया।
    15. भिवंडी में बायोमेट्रिक मशीन जलकर खाक हो गई।
    16. अमेरिका के कैपिटल हिल एरिया में भीषण आग से करोड़ो  रुपये का नुकसान हो गया।
    17. नाशिक नगरपालिका के भवन में आग लगने से करोड़ो रूपये का नुकसान हो गया।
    18. रियाद के अल खरज इलाके में लगी भीषण आग से करोड़ो का माल जलकर खाक हो गया।
    19. गाजीपुर में 100 के करीब झुग्गी जलकर खाक हो गई।






    20.कर्नाटका में कोस्टमेटिक विनिर्माण इमारत में भीषण आग लगने से करोड़ो रुपयों का नुकसान हो गया..

    21दिल्ली के आकाशवाणी भवन में भीषण आग लगने से, करोड़ो रूपये का नुकसान हो गया..

    22.युक्रेन के नर्सिंग होम में भीषण आग लगने से 20 के करीब जन जिंदा जलकर देवलोक चले गये…वह काफी जन घायल हो गए..

    23.दिल्ली के उत्तम नगर नगर इलाके में स्थित एक आटोमोबाइल वर्कशॉप में भीषण आग लगने से करोड़ो रूपये का नुकसान हो गया*

    24.पटना के दीदारगंज इलाके में भीषण आग लगने से लाखो रुपये का नुकसान हो गया*

    25.अहमदाबाद में भीषण आग लगने से 12 दुकानें जलकर खाक हो गई*

    26.जालोर के महेशपुरा गाँव मे बस में भीषण आग लगने से 6 के करीब जन जिंदा जल गये…वह काफी जन घायल हो गए*

    27.रूस के सुपर मार्किट में भीषण आग लगने से करोड़ो रूपये का माल जलकर खाक हो गया*

    28.पालघर में भीषण आग लगने से लाखो रुपये का नुकसान हो गया..*

    29.चतरा में एनसीपीसी परियोजना इलाके में लगी भीषण आग से लाखो का स्क्रेप जलकर खाक हो गया*

    30.पश्चिम बंगाल में जुट मिल में लगी भीषण आग से लाखों मा माल जलकर खाक*

    31.लखनऊ में टैंट हाउस में गोदाम में भीषण आग लगने से 2 मासूम जिंदा जलकर देवलोक चले गए*

    32.लखनऊ आगरा एक्सप्रेस वे पर चलती बस जलकर खाक हो गई*

    33.सरकाघाट के बर्तन भण्डार में लगी भीषण आग से लाखों रुपये का माल जलकर खाक हो गया*

    1. अशोक राजपाल में रुई दुकान जलकर खाक

    35.भिवंडी डंपिंग ग्राउंड में लगी भीषण आग करोड़ो रूपये लागत बायो माईनिंग मशीन जलकर खाक*

    36.बडोदी के जड़ी बूटी गोदाम में लगी भीषण आग*

    37.डीडीघाट ओर कनाली कील के जंगल मे धधकी आग*

    38.दिल्ली में ito के पास लगी भीषण आग से करोड़ो रूपये का नुकसान*

    39.सोलन के माल रोड इलाक़े में लगी भीषण आग से लाखो का माल जलकर खाक…*

    ?सेकड़ो की सँख्या में वाहन जलकर खाक हो गए…

    बाइके खड़ी खड़ी जल रही है….

    ?कार लोडिंग वाहन आदि एकाएक जलकर खाक हो रहे है…..

    ?घरों में… बिजनेश स्थल पर …गोदामों में…शॉप पर अचानक से आग लग रही है…

    ?अग्निकांड की घटनावों में कुछ जन भी देवलोक चले गये है….

    उपरोक्त सभी घटनाओं को ध्यान में रखा जाए तो यह कहना सही रहेगा कि ज्योतिषाचार्य गर्ग जी की भविष्यवाणी एक तरह से 100 प्रतिशत सटीक थी और धरातल पर एक दम सही साबित हुई है।
    गर्ग जी से हमारे सवांदान्ता ने घटना के पीछे किया ज्योतिष कारण रहा है पूछा तो उन्होंने बताया कि 15 जनवरी 2021 शुक्रवार  शाम को पंचक काल धनिष्ठा नक्षत्र विनाशकारी योग में शुरू हुआ था। शुक्रवार को शुरू हुआ पंचक काल अत्यधिक हानिकारक होता है। उन्होंने आगे बताया कि धनिष्ठा नक्षत्र चल प्रवति का नक्षत्र है, और यह घटना पर घटना को जन्म देता है। अग्निकांड का मुख्य कारक ग्रह मंगल वर्तमान में बहुत अधिक पीड़ित है।







    उन्होंने आगे भविष्यवाणी करते हुए कहा कि वर्तमान में राहू भी मंगल के नक्षत्र मृगशिर में गोचर कर रहा है व केतू  वृश्चिक राशि मे स्थित है। वृश्चिक राशि का स्वामी भी मंगल ही है। पंचक काल मे अशुभ घटना घटने पर घटना की पुनरावृत्ति होने के प्रबल सम्भवावना बनी रहती है। वर्तमान में  सूर्य शनि की युति  मंगल बद का योग बना रही है, जो को बड़ी ही अशुभ फलदायी है।
    जब हमारे सवांदान्ता ने गर्ग जी से पूछा सर यह स्थिति कब तक बनी रहेगी। उन्होंने बताया कि 22 फरवरी 2021 तक का समय  बड़ा ही प्रतिकूल है।

    एस्ट्रोलोजी एडवाइजर गर्ग जी Whats App Number 080786-65041






    उपरोक्त विचार लेखक के निजी विचार है ।

  • सार्वजनिक जीवन में मर्यादा से रहें

    डॉ गायत्री दीक्षित

    जिस प्रकार किसी को मनचाही स्पीड में गाड़ी चलाने का अधिकार नहीं है, क्योंकि रोड सार्वजनिक है। ठीक उसी प्रकार किसी भी लड़की को मनचाही अर्धनग्नता युक्त वस्त्र पहनने का अधिकार नहीं है क्योंकि जीवन सार्वजनिक है। एकांत रोड में स्पीड चलाओ, एकांत जगह में अर्द्धनग्न रहो। मगर सार्वजनिक जीवन में नियम मानने पड़ते हैं।

    भोजन जब स्वयं के पेट मे जा रहा हो तो केवल स्वयं की रुचि अनुसार बनेगा, लेकिन जब वह भोजन परिवार खायेगा तो सबकी रुचि व मान्यता देखनी पड़ेगी।

    लड़कियों का अर्धनग्न वस्त्र पहनने का मुद्दा उठाना उतना ही जरूरी है, जितना लड़को का शराब पीकर गाड़ी चलाने का मुद्दा उठाना जरूरी है। दोनों में एक्सीडेंट होगा ही।

    अपनी इच्छा केवल घर की चहारदीवारी में उचित है। घर से बाहर सार्वजनिक जीवन मे कदम रखते ही सामाजिक मर्यादा लड़का हो या लड़की उसे रखनी ही होगी।

    घूंघट और बुर्का जितना गलत है, उतना ही गलत अर्धनग्नता युक्त वस्त्र गलत है। बड़ी उम्र की लड़कियों का बच्चों की सी फ़टी निक्कर पहनकर छोटी टॉप पहनकर फैशन के नाम पर घूमना भारतीय संस्कृति का अंग नहीं है।

    जीवन भी गिटार या वीणा जैसा वाद्य यंत्र हो, ज्यादा कसना भी गलत है और ज्यादा ढील छोड़ना भी गलत है।

    संस्कार की जरूरत स्त्री व पुरुष दोनों को है, गाड़ी के दोनों पहिये में
    संस्कार की हवा चाहिए, एक भी पंचर हुआ तो जीवन डिस्टर्ब होगा।

    नग्नता यदि मॉडर्न होने की निशानी है, तो सबसे मॉडर्न जानवर है जिनके संस्कृति में कपड़े ही नही है। अतः जानवर से रेस न करें, सभ्यता व संस्कृति को स्वीकारें। कुत्ते को अधिकार है कि वह कहीं भी यूरिंन पास कर सकता है, सभ्य इंसान को यह अधिकार नहीं है। उसे सभ्यता से बन्द टॉयलेट उपयोग करना होगा। इसी तरह पशु को अधिकार है नग्न घूमने का, लेकिन सभ्य स्त्री को सभ्य वस्त्र का उपयोग सार्वजनिक जीवन मे करना ही होगा।

    अतः विनम्र अनुरोध है, सार्वजनिक जीवन मे मर्यादा न लांघें, सभ्यता से रहें। डॉ गायत्री दीक्षित के फेसबुक वॉल से

  • विशेष ! कुत्ता कुत्ते का मांस नहीं खाता

    राजेश दुबे

    कहते है कुत्ता कुत्ते का मांस नहीं खाता ।लेकिन वर्तमान दौर में सारी नैतिकता ,मर्यादा को ताक पर रखते हुए लोक तंत्र के चौथे खंभे के कुछ पहरेदारों  को  प्रतिस्पर्धा और लाभ का ऐसा चस्का लगा है कि अब वो मांस तो क्या हड्डियों को भी चबा जाना चाहते है ।

    एक निजी समाचार  चैनल  द्वारा टीआरपी में अव्वल आने के बाद दूसरे टीवी चैनल को “बीते दिनों” की बात और “कल तक” घोषित कर देने पर  यह लिखना आवश्यक हो जाता है, कि  मीडिया और पत्रकारों के भी कुछ दायरे होते है और उन दायरों में रह कर ही प्रतिस्पर्धा करना चाहिए ।

    अन्यथा वो दिन दूर नहीं जब मीडिया के बड़े घरानों पर भी चुटकुले बनने लगेंगे और उनकी इज्जत किसी कॉमेडी शो से अधिक नहीं रह जाएगी ।में बात कर रहा हूं आज के चर्चित समाचार चैनल रिपब्लिक भारत की, यह सही है कि विगत कुछ दिनों में इस चैनल के द्वारा कुछ मामलों को प्राथमिकता के साथ उठाया गया और उसका रिजल्ट भी देखने को मिला है ।

    लेकिन चैनल के डिबेट  “पूछता है भारत “हो या अन्य कार्यक्रम उनमें जिस तरह का व्यवहार गेस्ट के साथ किया जाता है उसके बाद यही लगता है कि चैनल के एडिटर और अन्य एंकर मछली बाज़ार में मछली बेचने उतरे हुए है और खरीदार किसी दूसरे से मछली ना खरीद ले उसके लिए छीना झपटी पर उतारू हो गए हैं ।

    यही नहीं शो के दौरान ऐसा लगता है कि अतिथि अगर एंकर के हिसाब से जबाव नहीं देगा तो कहीं ऐसा ना हो उसकी पिटाई हो जाए ।ये माना कि गला काट प्रतिस्पर्धा है और चैनल को चलाने के लिए ,सुर्खियों में बने रहने के लिए किसी भी चीज को बढ़ा चढ़ा कर पेश करना मजबूरी है ।

    उसके बावजूद भाषा के स्तर पर इतना घटियापन , आक्रमकता,चीखना चिल्लाना ,बोलते बोलते शर्ट के बाजू समेटना इसे पत्रकारिता नहीं बल्कि उद्दंडता कहेंगे और इसी उदंडता कि वजह से यह चैनल आज नंबर वन बन गया है जो कि विचारणीय प्रश्न है ।सवाल उठाता है कि क्या कारण है इस चैनल को पसंद करने की ,क्या इसके एंकरों की उदंडता कारण है या फिर इसकी निर्भीकता ।

    कारण जो भी हो, लेकिन अगर यही स्थिति रही तो कुछ दिनों बाद दूसरे चैनल भी इसी तरह की उदंडता करेंगे और कहीं ऐसा ना हो कि एंकरों की ऐसी कार्यशैली देख कर जो गेस्ट आते है वो भी कल कार्यक्रम में आते समय कहीं कट्टा लेकर ना पहुंचना शुरू कर दे । क्योंकि इससे पहले हाथापाई तो हो ही चुकी है ।