होली गीत : बिरज में पधारो -निधि चौधरी

बिरज में पधारो
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ओ मेरे प्यारे मोहन,
अबकी होंली रंगने तनमन,
बिरज में पधारो।
खूब हुआ व्याकुल ये मन,
ले कर रंगों का चमन
बिरज में पधारो।

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राधिका भी होगी तेरे ही श्याम रंग में,
गोपियां भी तो नचेंगी अब तेरे ही संग में ।
रंगों से रंगने सब के आंगन,
बिरज में पधारो।
ओ मेरे प्यारे मोहन,
अबकी होंली रंगने तनमन,
बिरज में पधारो।

खूब उड़ेंगे रंग ओ कान्हा, अब कि होली में,
ले के आना खुशियां, तुम तो अपनी झोली में।
रंगों से करने जहां ये पावन,
बिरज में पधारो।
ओ मेरे प्यारे मोहन
अबकी होंली रंगने तनमन,
बिरज में पधारो।

बिखर चुके है हम तो अब, हमें सवारों सावरें
सुध बुध खोए हम अब , तेरे प्रीत में ओ बावरें।
थम न जाए अब ये धड़कन,
बिरज में पधारो,
ओ मेरे प्यारे मोहन,
अबकी होंली रंगने तनमन,
बिरज में पधारो।