देश /डेस्क
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!केंद्र सरकार सोशल मीडिया कंपनियों पर सख्ती बढ़ाने वाली है ।सरकार ने साफ कर दिया है कि सोशल मीडिया के जरिए अगर भारत विरोधी गतिविधियां संचालित होती है तो इसका खामियाजा कंपनियों को उठाना पड़ेगा । केंद्रीय मंत्री श्री रवि शंकर प्रसाद ने ट्विटर सहित अन्य माइक्रो ब्लॉगिंग साइट को आज कड़ा संदेश दिया है ।बता दे कि बीते कुछ महीनों से सरकार को ट्विटर सहित अन्य कंपनियों के खिलाफ बड़ी शिकायत मिली थी जिसके बाद सरकार पूरे मामले पर गंभीर हो चुकी है ।
किसान आंदोलन की आड़ में ट्वीटर पर कई ऐसे फेक अकाउंट बनाए गए जिनके जरिए समाज में विद्वेष फैलाने की कोशिश की गई है ।आज सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राज्यसभा में फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सऐप और लिंक्डइन जैसे सोशल मीडिया मंचों को आगाह किया कि अगर उनका उपयोग भारत में झूठी खबरें फैलाने, हिंसा या वैमनस्य को बढ़ावा देने में किया जाता है तो उनके खिलाफ सख्ती की जाएगी।
श्री प्रसाद ने कहा कि अगर सोशल मीडिया का दुरूपयोग किया जाता है और झूठी खबरों के अलावा, हिंसा व वैमनस्य को बढ़ावा मिलता है तो ऐसे मामलों में कार्रवाई की जाएगी। श्री प्रसाद ने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान विभिन्न सवालों का जवाब देते हुए कहा कि सरकार सोशल मीडिया का सम्मान करती है और इस मंच से लोग अधिकार संपन्न हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम में सोशल मीडिया की अहम भूमिका रही है।
प्रसाद ने कहा कि सरकार आलोचना के अधिकार का भी सम्मान करती है लेकिन ऐसे मंचों को देश के संविधान तथा कानूनों का पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि अगर सोशल मीडिया के जरिए चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जाती है तो चुनाव आयोग के अलावा सरकार भी कार्रवाई करेगी।
उन्होंने कहा कि पिछले दिनों अमेरिकी संसद भवन में हिंसा और यहां लाल किले में किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान हिंसा के समय ऐसे मंचों का आचरण विरोधाभासी रहा।
उन्होंने कहा कि कई सोशल मीडिया मंचों ने अमेरिका में पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया लेकिन यहां भारत में उलटा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि ऐसा दोहरा मापदंड स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रसाद ने कहा कि ऐसी कंपनियां भारत में काम करें, पैसे कमाएं लेकिन साथ ही वे संविधान और देश के कानूनों का भी पालन करें।सरकार के इस कदम का देश की राष्ट्रवादी जनता स्वागत कर रही है और बुद्धिजीवियों का कहना है कि सरकार को तमाम सोशल मीडिया साइट्स पर नजर रखनी चाहिए और अगर कोई भारत के नियमों का उल्लंघन करता है तो उस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ।