राजेश दुबे
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बिहार विधान सभा का चुनाव इस बार कई मायनों में खास है ।चुनाव में जहां सत्ता धारी दल जदयू और आरजेडी जो कि पिछले चुनाव में एक साथ थे, वहीं इस बार अलग अलग एक दूसरे के खिलाफ ताल ठोक रहे है ।
इस चुनाव में दो नेता पुत्रो के भविष्य पर भी जनता मुहर लगाने वाली है ।दोनों नेता पुत्र युवा उत्साह से लबरेज है और अपने दम पर कुछ कर गुजरने की कोशिश में जुटे हुए है ।
ये दोनों ही नेता पुत्र इस बार बिना पिता के मौजूदगी में ही चुनाव लडने वाले है ।राजद नेता तेजस्वी यादव के पिता लालू यादव जेल में बंद है ,हालाकि जेल से ही वो कुछ मार्गदर्शन कर सकते है ।
वहीं चिराग पासवान के पिता राम विलास पासवान का निधन ठीक चुनाव से पहले हो गया उनके निधन के बाद पूरा दारोमदार अब चिराग के कंधे पर है कि कैसे वो पार्टी की नैया पार लगाते हैं ।
चिराग पासवान अकेले अपने दमखम पर मैदान में उतरे है । चिराग जदयू नेताओ और मुख्य मंत्री पर एक के बाद एक हमला बोल कर बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट का नारा देते हुए जनता का दिल जीतने की कोशिश में जुटे हुए है । चिराग बुधवार को विजन डॉक्यूमेंट भी जारी करेंगे ।
चिराग सीएम नीतीश कुमार के खिलाफ तो मुखर है परंतु बीजेपी नेताओं के खिलाफ वो पूरी तरह शांत है और खुद को पीएम मोदी का हनुमान बताते है ।यही नहीं चिराग ने बीजेपी के बागी उम्मीदवारों को लोजपा का टिकट देकर जदयू के खिलाफ मैदान में उतार दिया जो कि एक बड़ी रणनीति का ही हिस्सा है ।
चिराग को इसका फायदा भी मिला है ।कई विधान सभा क्षेत्रों में बीजेपी के पुराने धुरंधर कार्यकर्ता लोजपा के टिकट से मैदान में उतरे बीजेपी के बागी उम्मीदवारों का समर्थन कर रहे है ।
दूसरी तरफ तेजस्वी यादव सरकार द्वारा 15 वर्षों में किए गए कार्यों पर सवाल खड़ा करते हुए जनता से लोकलुभावन वायदे कर रहे है ताकि मतदाताओं का रुझान उनकी तरफ हो ।तेजस्वी की सभाओं में भारी भीड़ जुट रही है ।भीड़ वोट में कितना बदलती है यह तो चुनाव परिणामों के बाद ही पता चलेगा ।
चुनाव में दो नेता पुत्रो का भविष्य अब जनता जनार्दन के हाथो में है ।जनता जनार्दन सत्ता की छाभी किसे सौंपती है और इस दीपावली किसका घर खुशियों से रौशन होता है यह 10 नवंबर को ही पता चलेगा ।