तैयारियाँ हुई पूरी,सुबह अदा की जाएगी ईद की नमाज़

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ठाकुरगंज/रणविजय

ईद-उल-फितर की नमाज़ अदायगी को लेकर प्रखंड क्षेत्र में तैयारियाँ पूर्ण हो चुकी है सुबह मुस्लिम समुदाय के लोग पूरी सादगी और अक़ीदत के साथ ईद की नमाज़ अदा करेंगे।हालाँकि यह पहला मौका है जब ईद-उल-फितर जैसे खास त्यौहार के मौके पर ईदगाहों में नमाजियों के सामूहिक दाख़िला पर पाबंदी रहेगी, जिस वजह मुस्लिम समुदाय के लोग अपने अपने घर आँगन में ही अबकी बार ईद की नमाज़ अदा करेंगे।दरअसल कोविड-19 यानि वैश्विक कोरोना महामारी संकट के चलते जारी देशव्यापी लॉकडाउन के बाद से ही सामूहिक रूप से किसी भी तरह के धार्मिक सभा, जुलूस आदि आयोजन पर पाबंदी लगाई गई है जिस कारण अबकी बार ईद की नमाज़ लोग घर पर ही रहकर अदा करेंगे।

ईद की नमाज़ अदाएगी से पहले मुस्लिम समाज के भाई-बंधु अहले सुबह नहा धोकर नए कुर्ता-पजामा, टोपी, गमछा आदि परिधान पहने ईत्र लगाकर आँखों में सुरमा लगाए ईद की दो रकात नमाज़ अदा करेंगे तथा घर परिवार समाज और मुल्क की बेहतरी व सम्पूर्ण मानव जाति की रक्षा के लिए हाथों को ऊपर उठाकर अल्लाह से दुआ मांगेंगे ,फिर एक दूसरे को ईद की बधाइयाँ मुबारकबाद देकर घर में बने सेवइयों का जमकर लुत्फ़ उठाएंगे।

कहा जाता है कि रमजानुल मुबारक़ के इस पाक महीने में अल्लाह के बंदे पुरे माह अल्लाह के दरबार में मजदूरी देते हैं और आखिर में ईद की नमाज़ क़ायम फरमाते हुए अल्लाह अपने बन्दों को रहमत, बरकत, जाने अनजाने की गई गुनाहों से माफ़ी व शिफ़ा,सवाब वगैरह का इनाम देते हैं।इधर ईद की पूर्व संध्या बेला तक लोगों के द्वारा जरूरत के सामग्रियों की खरीददारी भी जारी रही।कपड़ा, सेवइयां,इत्र आदि की प्रतिष्ठानों में लोगों का बारी बारी से आवाजाही लगा रहा।उधर साल का पहला और सबसे बड़ा त्यौहार ईद-उल-फितर की नमाज़ ईदगाहों में अदा नही कर पाने का सभी को मलाल है फिर भी लोगों में उत्साह और उमंग की कमी नज़र नही आई है ईद की नमाज़ अदायगी को लेकर मुस्लिम भाइयों में काफी अमन-चमन का माहौल है खासकर बच्चों और युवाओं के चेहरे पर ईद की ख़ुशी व रौनक साफ झलक रही है त्यौहार को बेहतर तरीके से मनाने के लिए वे लोग काफी उत्साहित हैं।हालाँकि गुज़श्ता सालों के दौरान ईदगाहों में पूरी की गई ईद की नमाज़ की यादें नमाजियों के जेहन में ताजा होना स्वभाविक बातें होंगी।

जैसे,अहले सुबह नहा धोकर नए कुर्ता पाजामा, टोपी,गमछा व आँखों में सुरमा और कपड़ों में इत्र लगाए तस्बीह पढ़ते हुए एक मार्ग से ईदगाहों में इकट्ठा होना फिर नमाज़ अदाएगी के बाद एक दूसरे के गले मिल शिक़वा शिकायत भूलाकर ईद की मुबारकबाद देना,ईदगाहों के इर्द-गिर्द आयोजित मेले में बच्चों को खिलौना आदि खरीदकर देना और फिर दूसरे मार्ग से ख़ुशी ख़ुशी हर्षोल्लास और पुरे उमंग के साथ सेवइयों का लुत्फ़ उठाने के लिए घरों की तरफ रवाना देना और दूर-दराज के दोस्त रिश्तेदारों के घर की दावतें पूरी करना आदि खास बातें खूब याद आएंगी।