उत्सव -कुमार राहुल की कलम से

 
रजनीश के अनुसार मौत जिंदगी का अंत नहीं ,बल्कि एक नई जिंदगी की शुरुआत है ।इसलिए ‘ओशो ‘को मानने वाले मृत्यु को सेलिब्रेट  करते और उत्सव के रूप में मनाते हैं। चाइना ने विश्वव्यापी उत्सव का नाम दिया है ,नोबेल कोरोना वायरस या कोविड-19। भारत ने इस उत्सव  को  दिल से मनाने को ठाना… शुरुआत 2020 में हुई, ताली थाली बजाने से ,2021 जनवरी फरवरी में जश्न मना कर बताया गया कि  हमनें कोरोना  को हरा दिया है ।उसके बाद टीका उत्सव मनाया गया ।

इन सब बातों को करने से पहले ,भारत के ही चाणक्य ,की बात भूल गए कि 1. मैं यह क्यों कर रहा हूं  2.इसका परिणाम क्या होगा  3.क्या इसमें सफल होगें… इन तीनों का सही जवाब मिल जाए …तब आगे बढ़ना चाहिए …लेकिन हम लोग हैं ,कि मन की बातें सुनते हैं, चाहे वह सच्चाई से परे हो।






गुजरात मॉडल की बात कर सत्ता में काबिज होने वालों की ,आज का गुजरात मॉडल यह  है कि 1 मई से 10 मई 2021 तक 1,24,000 डेथ सर्टिफिकेट सरकार द्वारा ही जारी कर दिया गया ,और सरकार का ही सरकारी आंकड़ा बीमारी से मृत्यु का आंकड़ा मात्र 4000 बता रही है ।जबकि यूपी मॉडल यह है ,कि कन्नौज के गंगा नदी के महादेव घाट, के पास 350 शव दफन है, उन्नाव का शुक्लागंज घाट ,और बक्सर घाट में 900 से ज्यादा शव दफन है ,कानपुर के शेरेचश्वर घाट में 400 लाशें दफन है  जिनमें से कुछ को कुत्ते नोचते नजर आते हैं ।

प्रयागराज , मिर्जापुर में 50 लाशें  मिली है। अखबारों में  खबर आने के बाद, आनन-फानन में  कफन हटा कर लाशों को दफन कर रही है। बाकी हजारों बहती लाशें जो गंगा में बहार आई, उसका कोई हिसाब किताब अभी तक सरकार के पास नहीं है, जबकि जांच में पता चला कि सारी लाशें यूपी से बहकर आई है । लाशें यूपी से आई और योगी सरकार ने बिहार के लोगों को यूपी में लाकर दाह संस्कार की मनाही का ऑर्डर जारी कर दिया, बाद में बिहार के लोगों ने भी कहना शुरू कर दिया, कि यूपी के लोगों को… गया …में पिंडदान नहीं करने देंगे।  ऐसी स्थिति को देखकर , फणीश्वर नाथ रेणु का गाड़ीवान… हीरामन…और प्रेमचंद का अलगु चौधरी और जुम्मन शेख बहुत शर्मसार है …यूपी बिहार के गांव में हजारों लोगों की मौत …सर्दी.. खासी से हो रही है ..जो ना तो सरकारी अस्पताल में टेस्ट करवा रहे हैं ,ना उनका इलाज कराने वाला कोई है ..यह हाल केवल यूपी ,बिहार का ही नहीं, बल्कि राजस्थान ,मध्य प्रदेश,महाराष्ट्र इत्यादि भारत के सभी राज्यों की है ।

गांव में कोरोना से मरने वाले लोगों का आंकड़ा सरकार के पास नहीं है। द इकोनॉमिस्ट के अनुसार भारत में प्रतिदिन 20000 मौतें हो रही है ।जबकि सरकारी आंकड़ा मात्र 4000 मौतों को ही दर्शाता है। यानी अभी तक 1000000 मौतें हो चुकी है। आंकड़ों की बाजीगरी मुझे तब पता चला, जब मेरी पत्नी टीका लेने गई .. vaccine  तो मिला नहीं, लेकिन मोबाइल में मैसेज आ गया ,कि आपका कोरोना Antigen टेस्ट नेगेटिव है। सभी राज्य सरकारों की तरह बिहार सरकार भी कह रही है कि टेस्टिंग लगभग 109000  एक दिन मे हो रहा है। और पॉजिटिविटी रेट 10% नीचे आ चुकी है ।जिनका टेस्ट होना चाहिए ,वह बिना टेस्ट ,इलाज के लिए मर  रहे हैं ।जिनके मोबाइल नंबर मिले ,उन्हें पेशेंट बनाकर पॉजिटिव और नेगेटिव बनाया जा रहा है ।

लाखों की संख्या में लोगों ने अपने परिजनों को खोया है, और इसे नियति मानकर दिल को दिलासा दे रहे हैं। जबकि पूर्व हेल्थ सेक्रेट्री सुजाता राव के अनुसार सरकार vaccine खरीदने बहुत देर कर चुकी है। जबकि प्रख्यात कार्डियोलॉजिस्ट  डॉ देवी शेट्टी के अनुसार, वैक्सीनेशन प्राइवेट हैंड में भी देना चाहिए ,जिससे रात.. दिन सभी लोगों के प्रयास से जल्द से जल्द 70% तक लोगों को वैक्सीनेशन किया जा सके। बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था से लाखों मौत का जिम्मेदार लोग केंद्र सरकार को मान रहे। ऐसे में डैमेज कंट्रोल के लिए प्रधानमंत्री मोदी भी अब सामने आए ,और RSS प्रमुख मोहन भागवत ने तो यहां तक कहा, कि सरकार प्रशासन और लोगों की लापरवाही से ऐसे हालत हुए हैं।






एक सर्वे के अनुसार भारतीय 60%, इंडोनेशिया के लोग 35%, और नाइजीरिया के लोग 78%, अपनी बीमारी के इलाज का. खर्च खुद उठाते हैं ।और भारत  अपनी  जीडीपी का  मात्र1.2%  ही स्वास्थ्य में खर्च करता है ।भारतीयों की माली हालत बहुत खराब है ।लगभग 23 करोड मध्यम वर्ग के लोग इस बीमारी लॉक डाउन के कारण  गरीबी रेखा से नीचे आ गए हैं। उपरोक्त सारी स्थिति तो कतई उत्सव मनाने को प्रेरित नहीं करती। जैसे चीन का बुहान आज उत्सव मना रहा है ।लेकिन हम सब भारतीय हैं, हर गम को धुएं में उड़ा कर एक बार फिर जरुर आगे बढ़ेंगे। उम्मीद है ,कि इतने सारे लोगों की मृत्यु के बाद ना कोई सामूहिक तेरहवी होगी ,ना कोई शांति भोज, ना कोई जश्न ना  ‘उत्सव’

उपरोक्त विचार लेखक के निजी विचार है ।

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