Tag: वेबीनार

  • दिल्ली : भारत -स्वीडन रक्षा उद्योग सहयोग पर वेबिनार का हुआ आयोजन ,रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने निवेश के लिए स्वीडन की कंपनियों को किया आमंत्रित

    दिल्ली : भारत-स्वीडन रक्षा उद्योग सहयोग पर ‘कैपिटलाइज़िंग अपॉर्चुनिटीज़ फ़ॉर ग्रोथ एंड सिक्योरिटी’ विषय पर एक वेबिनार का आयोजन आज किया गया। इसका आयोजन रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा मंत्रालय के तत्वावधान में सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (एसआईडीएम) और स्वीडिश सिक्योरिटी एंड डिफेंस इंडस्ट्री (एसओएफएफ) के माध्यम से किया गया था। इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि थे जबकि स्वीडन के रक्षा मंत्री श्री पीटर हल्टक्विस्ट विशिष्ट अतिथि थे।वहीं स्वीडन में भारत के राजदूत श्री तन्मय लाल, भारत में स्वीडन के राजदूत श्री क्लस मोलिन, रक्षा सचिव डॉ. अजय कुमार, सचिव (रक्षा उत्पादन) श्री राज कुमार, दोनों देशों के रक्षा मंत्रालयों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय और स्वीडिश रक्षा उद्योगों के प्रतिनिधि एवं एसआईडीएम और एसओएफएफ के अधिकारियों ने भी वेबिनार में भाग लिया। 






    उद्घाटन भाषण में श्री राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार द्वारा शुरू की गई अनेक प्रगतिशील नीतियों तथा प्रक्रियागत सुधारों को सूचीबद्ध किया, जिन्होंने घरेलू और वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए रक्षा उद्योग का रूपांतरण कर दिया है। उन्होंने कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ का आदर्श वाक्य ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ है, साथ में उन्होंने जोड़ा कि इस अभियान में रक्षा क्षेत्र की परिकल्पना भारत के आर्थिक विकास में प्रमुख भूमिका निभाने के लिए की गई है और यह भारत और दुनिया के लिए लागत प्रभावी गुणवत्ता वाले उत्पादों के निर्माण पर केंद्रित है।रक्षा मंत्रालय द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया गया कि रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) 2020 पर, रक्षा मंत्री ने कहा कि यह घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करता है और भारत को रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि एफडीआई उदारीकरण और कारोबार करने में सुगमता जैसे नीतिगत फैसले दुनिया की शीर्ष रक्षा कंपनियों को आकर्षित कर रहे हैं और भारत में संयुक्त उद्यम प्रतिष्ठान हैं। एफडीआई नियमों में आसानी और रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) 2020 में खरीद (ग्लोबल – मैन्युफैक्चर इन इंडिया) की शुरूआत विदेशी ओईएम को भारतीय रक्षा उद्योग द्वारा पेश किए गए अवसरों में भाग लेने के लिए आमंत्रित करती है। उन्होंने कहा, “विदेशी ओईएम व्यक्तिगत रूप से विनिर्माण सुविधाएं स्थापित कर सकते हैं या ‘मेक इन इंडिया’ अवसर को भुनाने के लिए एक संयुक्त उद्यम या प्रौद्योगिकी समझौते के माध्यम से भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी कर सकते हैं।”







    श्री राजनाथ सिंह ने स्वीडन की कंपनियों को उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में रक्षा गलियारों में निवेश करने के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि वे राज्य सरकारों द्वारा दिए जा रहे अनूठे प्रोत्साहनों और भारत में अत्यधिक कुशल कार्यबल की उपलब्धता से लाभान्वित हो सकते हैं। इस बात पर जोर देते हुए कि भारत-स्वीडन साझेदारियों की अधिक संभावनाएं हैं, उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय रक्षा उद्योग की मजबूत क्षमताओं और पारस्परिक हित के क्षेत्रों में सह-विकास और सह-उत्पादन हेतु स्वीडिश कंपनियों के साथ सहयोग करने की भारतीय रक्षा उद्योग की इच्छा पर प्रकाश डाला।


    बता दे की “स्वीडिश फर्मों की पहले से ही भारत में प्रमुख उपस्थिति है। स्वीडिश और भारतीय रक्षा उद्योग में सह-उत्पादन और सह-विकास हेतु काफी गुंजाइश है। भारतीय उद्योग स्वीडिश उद्योगों को पुर्ज़ों की आपूर्ति भी कर सकता है। प्रौद्योगिकी केंद्रित एफडीआई नीति से भारतीय उद्योग स्वीडिश कंपनियों के साथ आला और सिद्ध सैन्य प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोग कर सकेंगे।


    रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत के पास 41 आयुध कारखानों, नौ रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और 12,000 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के पारिस्थितिकी तंत्र द्वारा समर्थित निजी क्षेत्र के उद्योगों के विस्तार के साथ एक विशाल रक्षा औद्योगिक आधार है, साथ ही उन्होंने कहा कि भारतीय रक्षा उद्योगों के पास हवा, भूमि, समुद्र और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के लिए उच्च तकनीक वाली रक्षा प्रणालियों की एक विस्तृत श्रृंखला पर विशेषज्ञता है। “भारत में एक मजबूत जहाज निर्माण उद्योग है। भारतीय शिपयार्डों द्वारा निर्मित जहाज वैश्विक मानकों के हैं और अत्यंत लागत प्रभावी हैं। उन्होंने कहा कि भारत और स्वीडन पारस्परिक लाभ के लिए जहाज निर्माण उद्योग में सहयोग कर सकते हैं। श्री राजनाथ सिंह ने दोनों देशों के बीच औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने के लिए एसआईडीएम, भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और एसओएफएफ के निरंतर प्रयासों की सराहना की।







    इस अवसर पर द्विपक्षीय रक्षा औद्योगिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए एसआईडीएम और एसओएफएफ के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए जिसमें आपसी उद्देश्यों को आगे ले जाने के लिए एक समर्पित संयुक्त कार्य समूह का गठन किया जाएगा।
    श्री राजनाथ सिंह ने ‘एसआईडीएम सदस्य निर्देशिका 2020-21’ के पहले संस्करण का विमोचन भी किया- जो भारतीय रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र का 360º कोण से अवलोकन है। निर्देशिका में रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में 437 कंपनियों की क्षमताओं का उल्लेख है, यह भारतीय उद्योग के बारे में जानकारी पाने की पहुंच को आसान बनाती है और वैश्विक रक्षा समुदाय के लिए एक ठोस संदर्भ के रूप में कार्य करती है। निर्देशिका में नवीनतम 108 वस्तुओं की खरीद की दूसरी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची को भी शामिल किया गया है। 






    देश की अन्य खबरें पढ़े :

  • टीका लेने वाले 97% से अधिक लोगों ने टीकाकरण अभियान को सराहा -डॉ. विनोद के. पॉल

    • 5 और टीके क्लीनिकल ट्रायल फेज में हैं: डॉ. रेणु स्वरूप

    • ‘कैसे बढ़ाएं टीकाकरण पर भरोसा’ वेबिनार का आयोजन

    पटना /प्रतिनिधि

    भारत में कोविड-19 टीका लगवाने वाले 97% लोग अब तक इस टीकाकरण से संतुष्ट पाए गए हैं। यह जानकारी नीति आयोग के सदस्य और भारत सरकार के कोविड-19 टास्क फोर्स के प्रमुख डॉ. विनोद कुमार पॉल ने दी है। दुनिया के अब तक के सबसे बड़े टीकाकरण कार्यक्रम के तहत भारत ने 66 लाख लोगों को कोविड-19 के टीके लगा दिए हैं। इनमें स्वास्थ्य कर्मी और फ्रंटलाइन कार्यकर्ता शामिल हैं, जिन्हें इसका खतरा ज्यादा है। ‘कैसे बढ़ाएं टीकाकरण पर भरोसा’ वेबिनार का आयोजन हार्वर्ड टी.एच. चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ- इंडिया रिसर्च सेंटर और प्रोजेक्ट संचार की ओर से किया गया। इसमें भारतीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने कोविड-19 टीकाकरण पर भारतीय संदर्भ में चर्चा की।






    1500 में मुश्किल से 1 को कोई हल्का साइड इफेक्ट हो रहा:

    नीति आयोग के सदस्य और भारत सरकार की कोविड-19 टास्क फोर्स, के अध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार पॉल ने कहा कि भारत का टीकाकरण का अब तक का अनुभव बहुत सकारात्मक और उत्साहवर्धक रहा है। उन्होंने कहा, “टीकों को ले कर हिचकिचाहट अब बहुत तेजी से समाप्त हो रही है। दोनों टीके सर्वाधिक सुरक्षित टीकों में हैं। ये टीके लेने वाले 1500 लोगों में से सिर्फ 1 को टीकाकरण उपरांत समस्या हो रही है और वह भी बहुत हल्की।” देश की बड़ी आबादी को टीका उपलब्ध करवाने की भारत की रणनीति के बारे में उन्होंने कहा, “इतने बड़े कार्यक्रम के लिए भारत के आत्मविश्वास का आधार घरेलू टीकों की व्यापक उपलब्धता, टीकों के भंडारण और वितरण की विशाल ढांचागत सुविधाएं और ‘को-विन’ के रूप में एक समग्र आईटी समाधान है।”उन्होंने कहा कि को-विन टीकों की आपूर्ति, कोल्ड चेन की स्थिति और टीकों के भंडार पर नजर रखने के लिहाज से तो बेहद उपयोगी है ही साथ ही यह लाभार्थियों को टीके संबंधी सूचनाएं भी उपलब्ध करवा देता है।






    जैव-चिकित्सकीय क्षेत्र में भारत के निवेश का मिल रहा लाभ:

    भारत सरकार के जैव प्रोद्योगिकी विभाग की सचिव डॉ. रेणु स्वरूप ने कहा मानव संसाधन, ढांचागत सुविधाओं और टीकों के लिए उपयुक्त माहौल बनाने में किया गया भारत का प्रयास अब तक के इस टीकाकरण कार्यक्रम की सफलता की मुख्य वजह रहा है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा,“भारत में 5-6 टीके मंजूरी की प्रक्रिया में काफी आगे पहुंच चुके हैं। इनमें से दो टीके फेज-3 ट्रायल में हैं। जो टीके तैयार किए जा रहे हैं उनमें एक डीएनए आधारित टीका है जिसे कैडिला बना रही है। इसी तरह एक एमआरएनए आधारित टीका जिनोवा बना रही है, आरबीडी आधारित प्लेटफार्म पर बायो-ई का टीका तैयार हो रहा है और रूसी स्पुतनिक टीके का भारतीय साझेदारी में ट्रायल चल रहा है। भारत बायोटेक दूसरे टीकों के अलावा नाक से दिया जाने वाला टीका भी तैयार कर रहा है। कई दूसरे टीके भी प्री क्लीनिकल ट्रायल में काफी आगे बढ़ चुके हैं।” उन्होंने कहा, “जैसा कि प्रधानमंत्री ने कहा है ‘मैत्री टीका आपूर्ति कार्यक्रम’ के माध्यम से जल्दी ही कई और टीके भी दुनिया भर के लोगों के लिए उपलब्ध होंगे।”

    कोविड-19 के भारतीय टीके पूरी तरह सुरक्षित:

    भारत सरकार की राष्ट्रीय टीकाकरण तकनीकी सलाहकार समूह की कोविड-19 उप-समिति के प्रमुख डॉ. एन.के. अरोड़ा ने बताया कि भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) की ओर से 2019 में लिए गए फैसले के आधार पर आपात स्थिति में टीकों या दवाओं के उपयोग के लिए विशेष व्यवस्था की जा सकी है। उन्होंने कहा कि टीकों को ऐसी मंजूरी देते समय तीन तरह के आंकड़ों की जरूरत होती है- सुरक्षा, प्रभाव और प्रतिरक्षा या बाहरी तत्तों से लड़ने की शक्ति (इम्यूनोजेनेसिटी)। किसी टीके के ‘आपातकालीन उपयोग’ के लिए सिर्फ सुरक्षा और प्रतिरक्षा के आंकड़े पर्याप्त माने जाते हैं। यही पैमाना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य है। इस आधार पर भारत के कोवैक्सीन और कोविशिल्ड दोनों टीके उपयोग के लिए उपयुक्त हैं। अभी कोवैक्सीन के प्रभाव के आंकड़े आने बाकी हैं, लेकिन आम लोगों को निश्चिंत रहना चाहिए क्योंकि इसका एंटीबॉडी उत्पादन बहुत शानदार है और यह उपयोग के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। ”






    कम्यूनिकेशन सर्विलेंस सिस्टम) स्थापित करने पर जोर:

    विश्वास और पारदर्शिता से ही मजबूत होते हैं टीकाकरण अभियान
    हार्वर्ड टी.एच. चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में स्वास्थ्य संचार के ली कम की प्रोफेसर के विश्वनाथ ने टीकाकरण के संबंध में ‘संवाद चौकसी व्यवस्था’(कम्यूनिकेशन सर्विलेंस सिस्टम) स्थापित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इसके तहत ऐसी व्यवस्था हो जो पहले से अंदाजा लगा ले कि टीकों के संबंध में क्या संभावित भ्रामक या गलत सूचना फैलाई जा सकती हैं। इनका सामना करने के लिए पहले से ही तैयारी कर ली जाए। डॉ. विश्वनाथ अमेरिका के स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग के राष्ट्रीय टीका सलाहकार समिति के तहत गठित टीकाकरण विश्वास बहाली समूह के प्रमुख रहे हैं। उन्होंने कहा, “पूर्व के टीकाकरण कार्यक्रमों के मुकाबले कोविड-19 टीकाकरण व्यापक जन निगरानी में हो रहा है। इस संबंध में अच्छे संयोजन के साथ और नियमित संवाद कायम रखने की जरूरत है। सरकार के विभिन्न स्तरों के साथ ही गैर सरकारी संगठन और लोक स्वास्थ्य संबंधी प्राधिकरणों के संवाद में एकरुपता काफी आवश्यक है।”
    विशेषज्ञों ने टीकों के संबंध में भ्रामक सूचना को रोकने में सोशल मीडिया प्लेटफार्म की भूमिका को विशिष तौर पर रेखांकित किया। साथ ही कहा कि टीकों से जुड़ी हिचकिचाहट दूर करने के लिए पूरे देश को एकजुट हो कर प्रयास करना चाहिए। इस वेबिनार का संचालन ‘राजस्थान पत्रिका’ समूह के राष्ट्रीय एकीकृत ब्यूरो प्रमुख मुकेश केजरीवाल ने किया।