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  • चप्पलों का चक्कर !

    लेखक अज्ञात

    हंसना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है यह एक व्यंग कहानी है । आशा है आप सभी को यह अच्छा लगेगा

    मेरी चप्पल पुरानी पड़ गई थी उन्होंने मुझे बेहद परेशान कर रखा था । वह कई बार रास्ते में चलते-चलते टूट चुकी थी, बार-बार मोची से मरम्मत करवा चुका था , मोची भी इनसे परेशान था ।

    वह 1 दिन बोला बाबूजी क्यों पैसे बर्बाद करते हैं । अब तो छुट्टी कीजिए इनकी ,मैं मोची से कहता बस अबकी बार इन्हें ठीक कर दो फिर नहीं लाऊंगा । लेकिन चप्पलों को तो बार बार टूटना था । नई खरीदने के लिए जेब में पैसे नहीं थे ।मैं फिर मोची की दुकान पर जाता मुझे देखते ही वह हंस पड़ता और कहता आ गए बाबूजी ,लाइए पहले आप की चप्पलों का इलाज कर दूं ।

    मुझे तब ऐसा लगता है जैसे डॉक्टर किसी मरते हुए मरीज को इंजेक्शन देकर जिंदा रख रहा है, रोज-रोज की परेशानी से मैं भी तंग आ गया ।आखिर एक दिन नए जूते ले ही आया । अब चप्पलों से मुझे क्या काम था ,सोचा चप्पलों को घर के बाहर नाली के किनारे रख देता हूं ,किसी को जरूरत होगी तो ले जाएगा ।

    लेकिन सुबह सफाई करने वाला आया और झाड़ू लगाते समय उसने मेरी चप्पल बाहर देखी वह फौरन उन्हें उठा लाया और आवाज लगाई बाबूजी आप भी खूब है, अपनी चप्पलों को इधर उधर रख देते हैं ,उन्हें संभालिए मैं उससे क्या कहता चुपचाप ले ली मन ही मन कहने लगा चप्पल को बाहर रख कर आया था ।

    यह घर में फिर आ गई यह मेरा साथ ही नहीं छोड़ती बहुत सोच-विचार के बाद चप्पलों को अखबार के कागज में लपेट और डोरा बांधा चप्पलों के बंडल को अपने साथ लेकर घूमने निकल गया ,उन्हें चौराहे के बीच रखकर वापस लौट आया ,छोटे साहब हमारे बाहर खेल रहे थे । उनकी नजर पड़ गई अखबार पर मेरा नाम देखा तो उठा लाए और बोले पिताजी संभालो अपनी चप्पल ,

    शायद कोई कुत्ता ले गया था चौराहे से लाया हूं, मैंने यह सब सुना तो लगा कि जैसे बिच्छू डंक मार दिया हो तो बंडल को रखवा दिया, घूमने निकला तो उसे अपने साथ ले गया और एक नीम के पेड़ के पर रख दिया पेड़ से उतर ही रहा था, कि कजोड़ मल जी मिल गए वह बोले लाल जी यहां क्या कर रहे हैं ।

    मैंने कहा कुछ नहीं बस एक दातुन तोड़ने चढ़ा था वह चले गए मैंने सोचा चलो अब तो छुटकारा मिला दूसरे दिन कजोड़ मल जी घर आ गए ,हाथ में चप्पलों का बंडल था, बोले वहीं लाल जी तुम भी खूब भुलक्कड़ हो कल दातुन तो तोड़ लाए पर चप्पलों का बंडल पेड़ पर ही छोड़ दिया ।

    यह तो मैं था जो इन्हें ले आया दूसरा होता तो पार कर जाता ,मैंने चुपचाप चप्पलों का बंडल ले लिया उन्हें धन्यवाद दिया ,चाय पिला कर उन्हें विदा किया और सोचने लगा यह चप्पल तो पीछा ही नहीं छोड़ रही हैं ।

    पहले मैं इन्हें नहीं छोड़ रहा था ,अब यह मुझे नहीं छोड़ना चाहती ।मैंने सोचा इनको कहीं गड्ढा खोदकर गाड़ दू ना रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी न कोई इनको देखेगा और न कोई इनको यहां लाएगा ।

    दूसरे दिन शाम को घर से दूर गया गहरा गड्ढा खोदकर बंडल को जमीन में गाड़ आया , पर वाह री किस्मत चप्पलों को गाड़ कर आया ही था ,चाय पी रहा था देखा कि मेरा पालतू झबरा कुत्ता चप्पलों को मुंह में दबाए चला आ रहा था ।बड़ी समझदारी से उसने चप्पल मेरे सामने चप्पल रख दी ,कभी दुम हिलाता तो कभी लौट कर को करतब करता ।

    जैसे कह रहा हो लाओ मेरा इनाम पर मैं उसे क्या कहता अपना माथा ठोक तारा वाह री चप्पल ।

  • सुंदरता का मूल्य

    कहानी

    एक अती सुन्दर महिला ने विमान में प्रवेश किया और अपनी सीट की तलाश में नजरें घुमाईं। उसने देखा कि उसकी सीट एक ऐसे व्यक्ति के बगल में है। जिसके दोनों ही हाथ नहीं है। महिला को उस अपाहिज व्यक्ति के पास बैठने में झिझक हुई।


    उस ‘सुंदर’ महिला ने एयरहोस्टेस से बोली “मै इस सीट पर सुविधापूर्वक यात्रा नहीं कर पाऊँगी। क्योंकि साथ की सीट पर जो व्यक्ति बैठा हुआ है उसके दोनों हाथ नहीं हैं।” उस सुन्दर महिला ने एयरहोस्टेस से सीट बदलने हेतु आग्रह किया।
    असहज हुई एयरहोस्टेस ने पूछा, “मैम क्या मुझे कारण बता सकती है..?”
    ‘सुंदर’ महिला ने जवाब दिया “मैं ऐसे लोगों को पसंद नहीं करती। मैं ऐसे व्यक्ति के पास बैठकर यात्रा नहीं कर पाउंगी।”


    दिखने में पढी लिखी और विनम्र प्रतीत होने वाली महिला की यह बात सुनकर एयरहोस्टेस अचंभित हो गई। महिला ने एक बार फिर एयरहोस्टेस से जोर देकर कहा कि “मैं उस सीट पर नहीं बैठ सकती। अतः मुझे कोई दूसरी सीट दे दी जाए।”


    एयरहोस्टेस ने खाली सीट की तलाश में चारों ओर नजर घुमाई, पर कोई भी सीट खाली नहीं दिखी।
    एयरहोस्टेस ने महिला से कहा कि “मैडम इस इकोनोमी क्लास में कोई सीट खाली नहीं है, किन्तु यात्रियों की सुविधा का ध्यान रखना हमारा दायित्व है। अतः मैं विमान के कप्तान से बात करती हूँ। कृपया तब तक थोडा धैर्य रखें।” ऐसा कहकर होस्टेस कप्तान से बात करने चली गई।


    कुछ समय बाद लोटने के बाद उसने महिला को बताया, “मैडम! आपको जो असुविधा हुई, उसके लिए बहुत खेद है | इस पूरे विमान में, केवल एक सीट खाली है और वह प्रथम श्रेणी में है। मैंने हमारी टीम से बात की और हमने एक असाधारण निर्णय लिया। एक यात्री को इकोनॉमी क्लास से प्रथम श्रेणी में भेजने का कार्य हमारी कंपनी के इतिहास में पहली बार हो रहा है।”
    ‘सुंदर’ महिला अत्यंत प्रसन्न हो गई, किन्तु इसके पहले कि वह अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करती और एक शब्द भी बोल पाती… एयरहोस्टेस उस अपाहिज और दोनों हाथ विहीन व्यक्ति की ओर बढ़ गई और विनम्रता पूर्वक उनसे पूछा “सर, क्या आप प्रथम श्रेणी में जा सकेंगे..? क्योंकि हम नहीं चाहते कि आप एक अशिष्ट यात्री के साथ यात्रा कर के परेशान हों।


    यह बात सुनकर सभी यात्रियों ने ताली बजाकर इस निर्णय का स्वागत किया। वह अति सुन्दर दिखने वाली महिला तो अब शर्म से नजरें ही नहीं उठा पा रही थी।
    तब उस अपाहिज व्यक्ति ने खड़े होकर कहा, “मैं एक भूतपूर्व सैनिक हूँ। और मैंने एक ऑपरेशन के दौरान कश्मीर सीमा पर हुए बम विस्फोट में अपने दोनों हाथ खोये थे। सबसे पहले, जब मैंने इन देवी जी की चर्चा सुनी, तब मैं सोच रहा था। की मैंने भी किन लोगों की सुरक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डाली और अपने हाथ खोये..?

    लेकिन जब आप सभी की प्रतिक्रिया देखी तो अब अपने आप पर गर्व महसूस हो रहा है कि मैंने अपने देश और देशवासियों की खातिर अपने दोनों हाथ खोये।”और इतना कह कर, वह प्रथम श्रेणी में चले गए।
    ‘सुंदर’ महिला पूरी तरह से शर्मिंदा होकर सर झुकाए सीट पर बैठ गई।
    अगर विचारों में उदारता नहीं है तो ऐसी सुंदरता का कोई मूल्य नहीं है ।

    नरेंद्र जी के फेसबुक वॉल से